संसद का मानसून सत्र गुरुवार (13 अगस्त) को लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी तकरार देखने को मिली। विपक्ष लगातार दिल्ली में Gen Z आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान और राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों पर संसद में चर्चा की मांग करता रहा। वहीं सरकार का कहना था कि वह चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष ही सदन में चर्चा से बच रहा है।
‘जवाब दो’ के नारों से गूंजा संसद परिसर
मानसून सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा और राज्यसभा में हंगामे का सिलसिला जारी रहा। विपक्षी दलों की प्रमुख मांगों में दिल्ली में Gen Z आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुए कथित बल प्रयोग और लाठीचार्ज के मामले में अमित शाह से जवाब मांगना शामिल था। इसके अलावा विपक्ष राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों पर भी सदन में चर्चा कराने की मांग पर कायम रहा।
सरकार ने सत्र के अंतिम दिनों में इन मुद्दों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया। 10 अगस्त को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि अमित शाह सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को भी सदन में मौजूद रहकर चर्चा में हिस्सा लेना होगा।
इसके बाद विपक्ष ने राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों पर चर्चा की मांग को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया। इसी बीच बुधवार को अमित शाह ने पहले मीडिया के सामने बयान दिया और फिर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा। अमित शाह ने कहा कि सरकार सभी सवालों के जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इस बात पर भी चर्चा करने को तैयार हैं कि विपक्ष चर्चा क्यों नहीं चाहता और सदन को चलने क्यों नहीं देना चाहता।
अमित शाह के बयान पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह अमित शाह के भाषणों में दिलचस्पी नहीं रखते, बल्कि यह जानना चाहते हैं कि बच्चों पर गोली किसने चलवाई।
बयानों के बीच संसद में गतिरोध खत्म नहीं हो सका। आखिरी दिन भी लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों सदन में मौजूद रहे। वंदे मातरम् का पूरा गायन होने के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाया संसद को न चलने देने का आरोप
सत्र खत्म होने के बाद विपक्ष ने सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस के संगठन महासचिव और लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार के रवैये की वजह से मानसून सत्र वॉशआउट हो गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता था कि छात्रों पर बल प्रयोग के मुद्दे पर सरकार संसद में जवाब दे और चंदे से जुड़े आरोपों पर चर्चा हो, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, “न तो प्रधानमंत्री और न ही गृह मंत्री सदन में आए. लोकतंत्र और संसद कैसे काम करेंगे? और आज, वे सिर्फ़ वंदे मातरम गाने के लिए आए. वे तब आए हैं, जब पूरा सत्र पहले ही हो चुका है.”
सरकार ने बताया कितना हुआ संसद में काम
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र के कामकाज को दो अलग-अलग नजरिए से देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि बिजनेस के लिहाज से सत्र काफी अच्छा रहा और इस दौरान कुल 12 बिल पास हुए। हालांकि, उन्होंने चर्चा के स्तर पर सत्र को संतोषजनक नहीं माना।
रिजिजू के मुताबिक लोकसभा की प्रोडक्टिविटी 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही। लोकसभा में नकल रोकने से संबंधित बिल पर ही चर्चा हो सकी और इसके अलावा ज्यादा प्रभावी चर्चा नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि चर्चा के लिहाज से सरकार सत्र के प्रदर्शन से खुश नहीं है।
उन्होंने कहा, ”मेरा तीन दशक का अनुभव है. ये पहली बार देखा कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है. पहली बार सरकार कह रही है चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन विपक्ष भाग गया. ये नया चीज देखने को मिला ये कल्पना से बाहर है. कांग्रेस के सांसद सोचते है उनका काम नारा लगाना और कार्ड लेकर हंगामा करना यही रह गया है. सुबह सुबह उठते है संसद में पहुंचते है नारा लगाते है.”
संसदीय कार्य मंत्री के अनुसार संसद के भीतर हंगामे के साथ-साथ परिसर में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी। कुछ मौकों पर दोनों पक्षों के सांसद आमने-सामने आ गए और सुरक्षा कर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा। इस दौरान दोनों ओर से जमकर नारेबाजी भी हुई।
दिल्ली में लाठीचार्ज के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने ‘अमित शाह सदन में आओ’ और ‘अमित शाह जवाब दो, जवाब दो’ जैसे नारे लगाए। वहीं मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में झारखंड में हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर एनडीए सांसदों ने विपक्ष को घेरा और ‘राहुल गांधी जवाब दो, जवाब दो’ के नारे लगाए।
परिसीमन और FCRA Bill पर भी थी सरकार की नजर
मानसून सत्र शुरू होने से पहले सरकार की ओर से कई अहम legislative plans को लेकर चर्चा थी। इनमें परिसीमन और FCRA से संबंधित बिल भी शामिल थे। हालांकि, विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच सरकार ने कुछ फैसलों को आगे बढ़ाने से रोक दिया।
FCRA Bill को बुधवार को सरकार ने संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेज दिया। वहीं परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संविधान संशोधन बिल को पारित कराने के लिए सरकार ने बहुमत जुटाने की कोशिश की थी।
इस दौरान टीएमसी और आम आदमी पार्टी में संभावित टूट की चर्चाएं भी सामने आईं। दावा किया गया कि डीएमके अपना रुख बदल सकती है। इसके अलावा कई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि शरद पवार की पार्टी के नेताओं से भी संपर्क किया गया था। हालांकि, इन राजनीतिक दावों के बीच परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव इस सत्र में आगे नहीं बढ़ सका।