देवीलाल की जयंती पर जुटे INDIA के नेता, पर नीतीश को क्यों याद आए दीनदयाल उपाध्याय; चर्चाएं तेज

क्या वाकई इंडिया गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है? बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कुछ ऐसा किया, जिसके बाद यह चर्चा फिर से शुरू हो गई है। इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) ने कैथल में पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल की 110वीं जयंती पर आयोजन किया था।

इस कार्यक्रम में विपक्ष भी जुटा हुआ था, लेकिन नीतीश कुमार यहां के बजाय दिल्ली में जन संघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती में हिस्सा लेने पहुंच गए। दिलचस्प बात यह है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब नीतीश कुमार ने भाजपा के आदर्श पुरुष के कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। जब वह 2022 से पहले एनडीए सरकार का हिस्सा थे, तो बिहार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती को राज्य समारोह के रूप में घोषित किया गया था। हालांकि महागठबंधन का हिस्सा बनने के बाद उन्होंने पिछले साल इस कार्यक्रम से दूरी बना ली थी।

नीतीश ने कही यह बात
तमाम चर्चाओं के बीच नीतीश कुमार ने मामले को नया रुख दे डाला। उन्होंने कहा कि हम सभी का सम्मान करते हैं। सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर सरकारी कार्यक्रम की घोषणा की थी। भाजपा पहले सरकार का हिस्सा थी, लेकिन आज कार्यक्रम में शामिल होने नहीं आई। भाजपा को इस बात का जवाब देना चाहिए कि वह क्यों नहीं पहुंचे। नीतीश कुमार ने आगे कहा कि हम सभी के लिए काम कर रहे हैं। भविष्य में भी हम इसी तरह से विकास के लिए काम करते रहेंगे। नीतीश ने आगे यह भी कहा कि उनके इस कदम से एनडीए के करीब जाने की बात कहना गलत है। उन्होंने कहा कि आप सभी जानते हैं कि मैं विपक्षी एकजुटता के लिए काम कर रहा हूं। दूसरे लोग क्या कहते हैं, इससे मेरा कुछ लेना-देना नहीं है।

कहा-मैं हर जगह जा रहा हूं
कैथल की अपनी यात्रा के संबंध में अनभिज्ञता जताते हुए नीतीश ने कहा कि मैं हर जगह जा रहा हूं। गौरतलब है कि आईएनएलडी ने इंडिया गठबंधन के ज्यादातर नेताओं को कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता भेजा था। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना-यूबीटी मुखिया उद्धव ठाकरे, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, एनसीपी मुखिया शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला, सीपीआईएम महासचिव सीताराम येचुरी, आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद रावण, जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल, रालोद के जयंत चौधरी आदि शमिल थे।

भाजपा में मतभेद
नीतीश कुमार की बातों के विपक्षी दल भाजपा में मतभेद दिखाई दिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर वह स्वर्गीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय से प्रभावित हैं तो इस कदम का स्वागत है। वहीं, राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार के लिए एनडीए के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो बार कह चुके हैं कि वह एक राजनीतिक बोझ हैं। उनकी उपयोगिता क्या है? उनके अंदर वोट ट्रांसफर करने की क्षमता भी नहीं हैं। हालांकि, पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि पार्टी में उन सभी नेताओं का स्वागत है जो राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाते हैं।

अलग-अलग मायने
वहीं, राजनीतिक विशेषज्ञ नीतीश कुमार के इस कदम के अलग ही मायने तलाश रहे हैं। इसे सीट बंटवारे का समय नजदीक आने के साथ गठबंधन सहयोगियों पर दबाव बनाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और राजनीतिक टिप्पणीकार प्रोफेसर (रिटायर्ड) एन के चौधरी ने कहा कि इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह एक ऐसे नेता हैं जो संकीर्ण मानसिकता वाले नहीं हैं। लेकिन सोमवार को भाजपा विचारक की वर्षगांठ पर उनकी उपस्थिति भाजपा की तुलना में आरजेडी के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अगर मुझे उचित हिस्सेदारी नहीं दी जाती है, तो मैं भाजपा के खिलाफ नहीं हूं। उन्होंने कहा कि नीतीश के इंडिया गठबंधन में भूमिका पाने में विफल रहने के बाद यह एक बड़ा संदेश भी है। बता दें कि ऐसी खबरें हैं कि नीतीश आरजेडी चीफ लालू प्रसाद के साथ सीट बंटवारे में मनपसंद सौदेबाजी करने में सफल नहीं रहे हैं।

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