
World Environment Day (नई दिल्ली): 5 जून को दुनियाभर में विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया गया। इस विशेष अवसर पर, प्रोग्रेसिव फाउंडेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में ग्लोबल वार्मिंग पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में भारत के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश पांडे ने की।
संयुक्त राष्ट्र का संदेश: पर्यावरण सुरक्षा के लिए जागरूकता जरूरी
संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विश्व पर्यावरण दिवस का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाना है। इस अवसर पर आयोजित सम्मेलन में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन, वायु प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे और ग्लोबल वार्मिंग जैसे ज्वलंत पर्यावरणीय मुद्दों पर गहरी चर्चा की गई।

ग्लोबल वार्मिंग और उसके गंभीर परिणाम
सम्मेलन में वक्ताओं ने वैश्विक तापमान में हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मानवीय गतिविधियों, खासकर ग्रीनहाउस गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। इस वृद्धि के कारण जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी तंत्र की अस्थिरता और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही, यह पौधों और जानवरों के जीवन के लिए भी एक गंभीर खतरा साबित हो रहा है।
प्रमुख हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की हस्तियां मौजूद थीं, जिनमें शामिल थे:
- एच एन शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री के सलाहकार
- नरेश रावल, पूर्व गृह मंत्री, गुजरात सरकार
- राहुल कश्यप, सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
- आर आर प्रसाद, मुख्य आयकर आयुक्त
- राकेश शर्मा, पूर्व मुख्य सचिव, उत्तराखंड
- कुमार राजीव रंजन सिंह, अध्यक्ष, भारत नीति अनुसंधान एवं विकास केंद्र
- आर एन मिश्रा, सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश, इलाहाबाद
- राजू परमार, पूर्व सांसद
- राहुल कश्यप, सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
- प्रबल प्रताप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार
- डॉ. विवेक गुप्ता, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, अपोलो अस्पताल, दिल्ली
- राकेश पांडे, प्रसिद्ध अभिनेता, गुजराती फिल्मों के
इन प्रमुख हस्तियों ने पर्यावरण सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया और विभिन्न उपायों पर चर्चा की।
संवेदनशीलता और समाधान की दिशा में पहल
सम्मेलन का उद्देश्य न केवल पर्यावरणीय समस्याओं की पहचान करना था, बल्कि उनके समाधान की दिशा में भी विचार-विमर्श करना था। वक्ताओं ने ठोस कदम उठाने और नीति-निर्माण में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
“अब नहीं तो कब?”
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था—”अब नहीं तो कब?” यह सम्मेलन एक मजबूत मंच साबित हुआ, जहां नीति निर्माता, विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता एक साथ आकर पर्यावरण की रक्षा के लिए संकल्पित हुए।
इस सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि हमें अब और विलंब नहीं करना चाहिए, और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए तात्कालिक कदम उठाने की आवश्यकता है।