
विपक्षी महागठबंधन INDIA की मुंबई में आज से तीसरी मीटिंग होने जा रही है। इस मीटिंग में गठबंधन के लोगो, संयोजक, मुख्यालय समेत कई एजेंडों पर चर्चा होने वाली है। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के एक ट्वीट से हलचल मच गई है।
उन्होंने जानकारी दी है कि 18 से 22 सितंबर के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। इस सत्र में 5 बैठकें होंगी। फिलहाल इस सत्र का एजेंडा साफ नहीं है, लेकिन चर्चाएं तेज हैं। इसके अलावा इस सत्र की जानकारी अभी ही क्यों दी गई, जब विपक्ष की मीटिंग हो रही है। इस पर भी कयास लग रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि संसद के 5 दिवसीय सत्र में अमृत काल से जुड़े कुछ प्रस्ताव पारित हो सकते हैं। 5 ही दिनों का सत्र है, जिसमें ज्यादा विधेयक पारित होने की संभावना नहीं है। फिर भी समान नागरिक संहिता समेत तमाम मसलों की चर्चा हो रही है और कहा जा रहा है कि कोई अहम बिल भी इस सत्र में लाए जा सकते हैं। संसदीय कार्य मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि जी-20 देशों की मीटिंग समाप्त होने के बाद सत्र के एजेंडे पर मुहर लगेगी। इस सत्र में कुछ अहम मुद्दों और कुछ विधेयकों पर भी चर्चा हो सकती है।
संसदीय कार्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगले सप्ताह एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि विशेष सत्र के दौरान एक प्रमुख मुद्दे और कुछ विधेयकों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, सत्तारूढ़ सरकार के एक वर्ग ने विशेष सत्र में यूसीसी विधेयक की संभावना से इनकार किया है। उन्होंने कहा, ”अब यूसीसी बिल लाने की कोई योजना नहीं है।” बता दें कि यूपीए काल के दौरान, वाम दलों द्वारा मनमोहन सिंह सरकार से जब समर्थन वापस लिया गया था तब विश्वास मत के लिए जुलाई 2008 में लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था। इसके अलावा, सरकार ने संविधान दिवस, भारत छोड़ो आंदोलन और अन्य विशेष अवसरों को मनाने के लिए सदनों की कई विशेष बैठकें बुलाई हैं।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस सत्र में समान नागरिक संहिता पर बात नहीं होगी। एक अफसर ने कहा, ‘जी-20 मीटिंग के बाद एजेंडा तय किया जाएगा। सरकार ने सत्र बुलाने का फैसला लिया है। इसलिए अभी इसकी औपचारिक जानकारी दी गई है। जी-20 के बाद एजेंडा भी तय हो जाएगा और फिर उसकी जानकारी दी जाएगी।’ संसद सत्र बुलाने का फैसला संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति लेती है और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी की जाती है। इससे पहले राज्यसभा का विशेष सत्र फरवरी 1977 में बुलाया गया था, जब तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन बढ़ाया जाना था।
वहीं यूपीए के शासनकाल में लोकसभा का विशेष सत्र जुलाई 2008 में बुलाया गया था। तब लेफ्ट पार्टियों ने मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और विश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा था। गौरतलब है कि दो दिनों की INDIA गठबंधन की मीटिंग से ठीक पहले विशेष सत्र के ऐलान ने चर्चाओं को तेज कर दिया है। एजेंडे के साथ ही टाइमिंग पर भी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि INDIA गठबंधन के माहौल को कमजोर करने के लिए भी सत्र के ऐलान की यह टाइमिंग चुनी गई है।