
मप्र के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम चौंकाने वाला रहा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश का सीएम बनने की दौड़ से सभी नाम बाहर हो गए। अब मप्र की कमान मोहन यादव के हाथ में रहेगी। यानी प्रदेश में अब शिव का राज नहीं मोहन राज होगा। मोहन यादव ने अपने राजनीति सफर की शुरुआत छात्र जीवन से की थी। अब वे प्रदेश के सत्ता के शीर्ष पर विराजमान हो गए हैं। दिग्गजों को दरकिनार कर मोदी के मन में क्यों बस गए उज्जैन के मोहन?माना जाता है की एमपी के नेतृत्व में पीढ़ी का बदलाव जरूरी था बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश में नई पीढ़ी की राजनीति की शुरुआत करने की कोशिश की है। मोहन यादव महज 58 साल के हैं। इससे बीजेपी ने मैसेज देने की कोशिश की है कि वह राज्य में सेकेंड लाइन नेतृत्व तैयार करने को लेकर तैयारी में है।दूसरी बात मोहन यादव तीन बार के विधायक हैं। वह उच्च शिक्षा मंत्री के तौर पर शिवराज कैबिनेट में काम कर चुके हैं। उन्हें सरकार में रहने और उसे चलाने का अच्छा खासा अनुभव रहा है। राजनीति में ऐसा माना जाता है कि सीएम, पीएम जैसे पदों पर नये चेहरे को लाने पर उसकी स्वीकार्यता में दिक्कत होती है। लेकिन मोहन यादव के पास अच्छा खासा अनुभव है, जिससे उन्हें सरकार चलाने में शायद ही कोई दिक्कत हो।मोहन यादव ने 1982 में माधव विज्ञान कॉलेज में पढ़ने के दौरान ही एबीवीपी के सदस्य बन गए थे। उसके बाद से वह लगातार एबीवीपी में अलग-अलग पदों पर बने रहे। इस लिहाज से देखें तो मोहन यादव में खांटी भाजपाई नजर आते हैं।महत्वापूर्ण बात यह है की मोहन यादव ओबीसी समाज से हैं। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में यादव की राजनीति का खासा असर है। इसे ध्यान में रखते हुए बीजेपी आलाकमान ने मोहन यादव को सीएम बनाकर लंबी राजनीतिक लकीर खींचने की कोशिश है। बीजेपी को उम्मीद है कि मोहन यादव का चेहरा 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश और बिहार में खासा असर डाल सकता है।मोहन यादव को सीएम बनाकर 2024 के लिए उत्तर के दो बड़े राज्यों को संदेश दिया है, जहां लोकसभा की 120 सीटें हैं और यादव ओबीसी में यादव वोटर्स एक निर्णायक वोट बैंक है।छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अगले पांच साल के लिए डॉ. मोहन यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला प्रदेश के नए उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नरेंद्र सिंह तोमर को एमपी विधानसभा स्पीकर की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. मोहन यादव 2013 और 2018 के बाद 2023 में भी उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट पर चुनाव जीते हैं। डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ था। उनके पिता पूनमचंद यादव और माता लीलाबाई यादव हैं। उनकी पत्नी सीमा यादव हैं।