चुनाव के बाद छोटे विपक्षी दलों का कांग्रेस में होगा विलय, PM मोदी का दावा; उद्धव पर निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शिवसेना (UBT) का उदाहरण देते हुए मतदाताओं को आगाह किया कि वह कांग्रेस की राह पर चल रही है।मुंबई में गर्मी और उमस भरे मौसम के बीच चुनाव प्रचार करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि शिव सेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का मानना था कि जिस दिन उनकी पार्टी कांग्रेस के रास्ते पर चलने लगेगी, वह शिव सेना का अंत होगा। पीएम मोदी ने कहा, ”महाराष्ट्र ने कांग्रेस के सामने घुटने टेकने वाली डुप्लीकेट शिवसेना को सजा देने का मन बना लिया है।” पीएम मोदी ने कहा, ”चुनाव के बाद छोटी पार्टियों का कांग्रेस में विलय हो जाएगा।”

शिवसेना नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ तत्कालीन गठबंधन सरकार के खिलाफ विद्रोह करने के बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी। शिंदे उद्धव ठाकरे के पिता द्वारा शुरू की गई पार्टी का नाम अपने पास रखने में कामयाब रहे और भाजपा के साथ साझेदारी में सरकार बनाई और खुद सीएम बने। अब महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी (अजित पवार) की गठबंधन सरकार है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार का नाम लिए बिना मोदी ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में ‘इंडिया’ गठबंधन के एक नेता को पता है कि कांग्रेस बुरी तरह हार रही है। इसलिए उन्होंने सुझाव दिया कि छोटे दलों को कांग्रेस में विलय कर देना चाहिए ताकि वह कम से कम विपक्षी पार्टी के रूप में खड़ी हो जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब नकली शिवसेना (शिवसेना यूबीटी का जिक्र करते हुए) का कांग्रेस में विलय होगा तो मैं बालासाहेब ठाकरे को याद करूंगा क्योंकि दिवंगत नेता ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर (के निर्माण) और अनुच्छेद 370 को खत्म करने का सपना देखा था।’’

इससे पहले उत्तर महाराष्ट्र में नासिक जिले के पिंपलगांव बसवंत में महायुति उम्मीदवारों केंद्रीय मंत्री भारती पवार (भाजपा) और हेमंत गोडसे (शिवसेना) के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि धार्मिक आधार पर बजट को विभाजित करना खतरनाक है। मोदी ने कहा कि संविधान के मुख्य शिल्पी बाबासाहेब आंबेडकर नौकरियों और शिक्षा में धर्म आधारित आरक्षण के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने दावा किया कि केंद्र में सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस ने कुल बजट का 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों को आवंटित करने की योजना बनाई थी।

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