सरकार की सख्ती के आगे Meta ने बदला रुख! CSAM कंटेंट पर लिया बड़ा Action, Safe Harbour पर भी उठे सवाल

केंद्र सरकार की सख्ती के बाद Meta ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री यानी CSAM (Child Sexual Abuse Material) के खिलाफ कार्रवाई की है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, Meta की ओर से ऐसे कंटेंट को हटाने के लिए कदम उठाए गए हैं। इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी गैरकानूनी सामग्री के मामले में सोशल मीडिया कंपनियां ‘सेफ हार्बर’ के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकतीं। हालांकि, किसी कंपनी ने कानून का उल्लंघन किया है या नहीं और ऐसी स्थिति में उसे ‘सेफ हार्बर’ का लाभ मिलेगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।

CSAM Content पर सरकार का कड़ा रुख

सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बार-बार सामने आने वाले गैरकानूनी कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, IT Act की धारा 69A के तहत सरकार द्वारा की जाने वाली कार्रवाई नियमों के अनुसार और सीमित मामलों में ही की जा रही है।

सरकार बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को लेकर बेहद गंभीर रुख अपना रही है। सूत्रों के मुताबिक, इसी सिलसिले में कुछ कार्रवाई भी सामने आई है। सरकार ने साफ किया है कि यदि किसी प्लेटफॉर्म पर कानून का उल्लंघन साबित होता है तो ऐसी स्थिति में ‘सेफ हार्बर’ की सुरक्षा उपलब्ध नहीं होगी।

Meta ने क्या कहा?

मामले को लेकर Meta की ओर से कहा गया है कि उसके ‘एल्गोरिदम’ और सिस्टम किस तरह काम करते हैं, साथ ही ऐसे मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा जारी है। मामले की जांच भी की जा रही है, क्योंकि इसका संबंध अन्य मैसेजिंग ऐप्स से भी है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, CSAM जैसे गंभीर और गैरकानूनी कंटेंट पर प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय करने को लेकर सरकार लगातार निगरानी कर रही है।

Social Media के नुकसान पर दूसरे देशों में भी चिंता

सोशल मीडिया से होने वाले संभावित नुकसान को लेकर चिंता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और ऐसे कंटेंट से होने वाले नुकसान को लेकर चर्चा तेज है।

सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान से निपटने की जिम्मेदारी संबंधित प्लेटफॉर्म की भी है। इसके अलावा AI से तैयार की गई सामग्री को लेकर भी नियमों को स्पष्ट किया गया है। कानून के मुताबिक AI-generated content पर ‘लेबल’ लगाना जरूरी है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इस प्रावधान का पालन करना होगा।

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