UPI Payment Charges को लेकर सियासी प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मायावती ने कहा कि नई व्यवस्था का अंतिम असर आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है।
मायावती ने लिखा कि यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के बाद अब उस लेनदेन पर शुल्क वसूलने की व्यवस्था लोगों की नजर में मुनाफाखोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली जैसी है। उन्होंने कहा कि इससे जनता में बेचैनी और आक्रोश होना स्वाभाविक है।
उन्होंने लिखा कि वैसे तो जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ’कर’ मानने को तैयार नहीं है, किन्तु दिनांक 15 अक्तूबर से लागू होने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाये जेब तो अन्ततः आमजनता की ही कटेगी, उसका ही खर्च बढ़ेगा.
हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नया MDR उपभोक्ताओं से सीधे नहीं लिया जाएगा। 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। सरकार के अनुसार P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे और करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन भी प्रभावित नहीं होंगे।
‘सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?’
मायावती ने देश में गरीबी और महंगाई के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने लिखा, ”साथ ही, यह भी सर्वविदित है कि देश की बहुसंख्यक जनता अपार गरीबी व जबरदस्त महंगाई आदि की मार से त्रस्त है व उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोजगारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक कम व कल्याणकारी ज्यादा हो तो यह उचित होगा. जनता की तंगी, दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?”
सरकार का कहना है कि MDR को टैक्स या सरकार अथवा NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं माना जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय के मुताबिक यह राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और पेमेंट ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होगी, ताकि UPI सिस्टम के संचालन और विस्तार को समर्थन मिल सके।
यूपी के Smart Schools पर भी मायावती की टिप्पणी
मायावती ने उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के करीब 14,500 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन इसके साथ बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने लिखा कि इसके साथ ही, यूपी सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के कीरब 14,500 स्कूलों को ’स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को कतिथ ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले उन्हें बुनियादी शिक्षा आदि की जरूरतें अर्थात स्कूली बच्चों के सर पर छत, उनके लिये बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था पूरी की जायें और यह सब प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये में क्या संभव हो पायेगा, इस पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक जरूर विचार करे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 14,429 प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में बदलने के लिए 300 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत प्रति स्कूल करीब 2.07 लाख रुपये की राशि का प्रावधान बताया गया है।