महमूद मदनी के सुप्रीम कोर्ट वाले बयान पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का तीखा पलटवार, बोले- करोड़ों मुसलमान सुप्रीम कोर्ट और सरकार पर भरोसा करते हैं

जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट को लेकर दिए गए अपने बयान से विवाद खड़ा कर दिया है। मदनी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट उस समय तक ही सुप्रीम कहलाने का हकदार है, जब तक आईन की पाबंदी करे और कानून के कर्तव्य का ख्याल रखे, अन्यथा वह नैतिक तौर पर सुप्रीम कहलाने का हकदार नहीं है।

उनके इस बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के मुखिया मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का तीखा रिएक्शन सामने आया है।

‘करोड़ों मुसलमान बयान से सहमत नहीं’

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने महमूद मदनी के बयान पर असहमति जताते हुए कहा:

“सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि भारत के करोड़ों मुसलमान उनके बयान से सहमत नहीं हैं। मौलाना महमूद मदनी एक धार्मिक व्यक्ति हैं। उन्हें धार्मिक दृष्टिकोण से बोलना चाहिए। उन्हें मुसलमानों को भड़काना नहीं चाहिए। करोड़ों मुसलमान सुप्रीम कोर्ट, संसद और सरकार पर भरोसा करते हैं।”

मदनी ने ‘जिहाद’ और ‘जुल्म’ पर क्या कहा था?

मौलाना महमूद मदनी ने ‘जिहाद’ शब्द को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर आपत्ति जताई थी। जमीयत उलमा-ए-हिंद की नेशनल गवर्निंग बॉडी मीटिंग में उन्होंने कहा था कि इस्लाम और मुसलमानों के दुश्मनों ने जिहाद जैसे इस्लाम के पवित्र विचारों को गलत इस्तेमाल, गड़बड़ी और हिंसा से जुड़े शब्दों में बदल दिया है।

  • विवादित टिप्पणी: मदनी ने कहा था कि “जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।”
  • अपमान का आरोप: उन्होंने कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद, एजुकेशन जिहाद और थूक जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके मुसलमानों को बहुत दुख पहुंचाया जाता है और उनके धर्म का अपमान किया जाता है।

न्यायपालिका की भूमिका पर मदनी का सवाल

महमूद मदनी ने यह भी कहा था कि बाबरी मस्जिद और ट्रिपल तलाक जैसे मामलों में फैसलों के बाद यह आम सोच बन गई है कि कोर्ट सरकारी दबाव में काम कर रहे हैं।

  • असुरक्षा की भावना: मदनी ने कहा था कि आज मुसलमान खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं और उन्हें कदम-कदम पर नफरतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ‘घर वापसी’ को भी दोहरा रवैया बताया था।

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