Marco Rubio On India: भारत की बढ़ती Energy Demand पर अमेरिका की बड़ी नजर, मार्को रुबियो ने दिया तेल और गैस सप्लाई बढ़ाने का ऑफर

भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को लेकर अमेरिका ने बड़ा संकेत दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से न केवल भारत की सप्लाई मजबूत होगी, बल्कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी भी नए स्तर पर पहुंचेगी।

भारत की ऊर्जा जरूरतों में भागीदार बनना चाहता है अमेरिका

व्हाइट हाउस में समाचार एजेंसी आईएएनएस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत लंबे समय से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की नीति पर काम कर रहा है और अमेरिका इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जाहिर है भारत बहुत लंबे समय से अपने एनर्जी सोर्स को डायवर्सिफाई करने पर फोकस कर रहा है और इसलिए यह ट्रेंड जारी रहेगा और हम निश्चित रूप से इसका हिस्सा बनना चाहेंगे. हमें लगता है कि हमारे पास इस बारे में कुछ समाधान हैं.”

मिडिल ईस्ट में शांति से जुड़े ऊर्जा बाजार

मार्को रुबियो ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति से भी जोड़ते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश इसलिए कर रहे हैं ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे और सहयोगी देशों को पर्याप्त ईंधन उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ने मिडिल ईस्ट में शांति को मौका इसलिए दिया है, क्योंकि वे चाहते हैं कि हमारे सहयोगी देशों के लिए मार्केट में ज्यादा फ्यूल आए.”

रुबियो ने यह भी कहा कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना होगा।

वेनेजुएला से भी तेल सप्लाई बढ़ाने की कोशिश

अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत के लिए भविष्य में वेनेजुएला को भी कच्चे तेल के संभावित स्रोत के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए उसके साथ मिलकर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि भारत न सिर्फ अमेरिका, बल्कि वेनेजुएला से भी बात कर रहा है. हम उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत करीब से काम कर रहे हैं.”

रुबियो ने यह भी कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पास वेनेजुएला के हेवी क्रूड को रिफाइन करने की क्षमता है। ऐसे में भविष्य में इस दिशा में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है।

भारत-अमेरिका के बीच कई क्षेत्रों में बढ़ रहा सहयोग

मार्को रुबियो ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच कई साझा रणनीतिक हित हैं।

उन्होंने कहा, “भारत दुनिया का सबसे बड़ा और अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है. मुझे लगता है कि हमारे बीच बहुत सी समानताएं हैं और हम मिलकर कई क्षेत्रों में काम कर सकते हैं.”

रुबियो ने अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, सुरक्षा और समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता जैसे क्षेत्रों को दोनों देशों के सहयोग के प्रमुख आधार बताया। साथ ही उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि यह समुदाय दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाता है।

ऊर्जा सहयोग बना रणनीतिक साझेदारी का अहम स्तंभ

रुबियो ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है। बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत लगातार कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का आयात बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने की भारत की रणनीति ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।

उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा के अलावा दोनों देश सिविल परमाणु ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और मजबूत सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग लगातार बढ़ा रहे हैं।

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