कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की सांसदी पर संकट, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

चंडीगढ़ लोकसभा सीट से चुनकर संसद जाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। लोकसभा चुनाव में मनीष के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले भाजपा नेता संजय टंडन ने भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए मनीष की लोकसभा चुनाव में हुई जीत को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी हैअपनी याचिका में टंडन ने तिवारी पर भ्रष्ट आचरण में शामिल होने का आरोप लगाया और कोर्ट से तिवारी की चुनाव में हुई जीत को रद्द करने की अपील की।चंडीगढ़ सीट पर मुख्य मुकाबला संजय टंडन और मनीष तिवारी के बीच ही था जिसमें तिवारी 2,504 वोटों के मामूली अंतर से जीते थे।अपनी याचिका में संजय टंडन ने कहा है कि मनीष तिवारी को पहले भी भ्रष्ट आचरण के लिए रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा फटकार लगाई गई थी। इसके बावजूद तिवारी और उनके समर्थक चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने वाली गतिविधियों में शामिल रहे। इससे उन्हें चुनाव में बढ़त बनाने में मदद मिली।कोर्ट में दायर इस याचिका में तिवारी के चुनाव को रद्द करने और संजय टंडन को चंडीगढ़ लोकसभा सीट का निर्वाचित सांसद घोषित करने की मांग की गई है। इसमें तिवारी सहित कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने मतदाताओं को पैसे का लालच दिया और नौकरी की गारंटी देने जैसे भ्रामक वादे किए। साथ ही, चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रीय प्रतीक का दुरुपयोग किया, जो जन प्रतिनिधित्व कानून की अलग-अलग धाराओं का उल्लंघन है।याचिका में हाई कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 100 और धारा 101 के तहत इस तरह का भ्रष्ट आचरण उनके चुनाव को रद्द करने का आधार है। टंडन की इस याचिका को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और 7 अगस्त को इस पर प्रस्ताव नोटिस जारी किया है मामले कि अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान मनीष तिवारी और संजय टंडन के बीच जमकर जुबानी जंग हुई थी। संजय ने उन पर निशाना साधते हुए उन्हें बाहरी कह दिया था। चुनाव परिणाम आने तक संजय अपनी जीत को पक्का मान रहे थे, लेकिन चुनाव परिणाम आया तो मनीष तिवारी इस सीट को जीतने में कामयाब रहे।

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