
हिंसाग्रस्त मणिपुर में शनिवार को 5 और लोगों की मौत हो गई। इनमें से तीन मैतेई समुदाय से और दो कुकी-ज़ोमी समुदाय से थे। राज्य में शनिवार शाम तक हिंसा जारी रही। मैतेई बहुल बिष्णुपुर जिले और कुकी-जोमी बहुल चुराचांदपुर जिले की सीमा पर तीव्र गोलीबारी हुई।इसके अलावा, राजधानी इंफाल में भी आगजनी हुई। पुलिस के अनुसार, बिष्णुपुर जिले के क्वाक्टा में शनिवार तड़के मैतेई समुदाय के तीन लोगों की उनके घरों के अंदर हत्या कर दी गई। पीड़ितों की पहचान 46 वर्षीय युमनाम जितेन मैतेई, 67 वर्षीय युमनाम पिशाक मैतेई और उनके बेटे 39 वर्षीय युमनाम प्रेमकुमार मैतेई के रूप में हुई है। सभी क्वाक्टा वार्ड के निवासी थे।
बिष्णुपुर एक मैतेई बहुल जिला है, वहीं चुराचांदपुर जिला कुकी-ज़ोमी बहुल है। दोनों जिलों की सीमा के करीब स्थित क्वाक्टा में, अधिकांश निवासी मुस्लिम मैतेई पंगल समुदाय से हैं। पुलिस ने बताया कि घटना शुक्रवार रात करीब दो बजे की है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हथियारबंद बदमाशों के बारे में संदेह है कि वे कुकी समुदाय से थे। उन्होंने एक मैतेई गांव को घेर लिया और इलाके में घरों में तोड़-फोड़ शुरू कर दी। कुछ ग्रामीणों ने फौबाकचाओ पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी से संपर्क किया। हालांकि, जब तक पुलिस टीम वहां पहुंची, उन्होंने पाया कि तीन लोग मारे गए थे, जिनमें एक पिता और पुत्र भी शामिल थे।” उन्होंने कहा कि मृतकों में से एक के सिर में गोली मारी गई थी, जबकि पिता और पुत्र को किसी तेज वस्तु से चोटें आई थीं।युमनम प्रेमकुमार की पत्नी युमनम आशा ने कहा कि उनके पति 3 मई को हिंसा भड़कने के बाद से क्वाक्टा हाई स्कूल में एक राहत शिविर में रह रहे थे। उन्होंने कहा कि वह यह मानकर शुक्रवार को अपने घर लौट आए थे कि कुछ हद तक स्थिति “शांत हो गई है।” बिष्णुपुर और चुराचंदपुर जिले के सीमावर्ती इलाके में भी गुरुवार को तनाव बढ़ गया और रुक-रुक कर गोलीबारी हुई। पुलिस ने कहा, ‘‘तीनों व्यक्ति एक राहत शिविर में रहते थे लेकिन स्थिति में सुधार होने के बाद शुक्रवार को क्वाक्टा स्थित अपने आवास पर लौट आए थे।’’ पुलिस के अनुसार, घटना के तुरंत बाद गुस्साई भीड़ क्वाक्टा में जमा हो गई और चुराचांदपुर की तरफ बढ़ने लगी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोक दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि हत्याओं के प्रतिशोध में भीड़ ने बिष्णुपुर जिले के उखा तम्पक में कई घरों को जला दिया।
शनिवार की सुबह फिर से दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी शुरू हो गई और बाद में सुबह चूड़ाचांदपुर जिले के सीमावर्ती गांव फोलजांग से कुकी-जोमी समुदाय के दो लोगों के शव बरामद किए गए। दोपहर करीब 12.30 बजे शवों को चुराचांदपुर जिला अस्पताल के मुर्दाघर में ले जाया गया। उनकी पहचान जांगखोमांग हाओकिप (40) और जॉनी लालखोलेन गुये (32) के रूप में हुई है। चुराचांदपुर के संगठनों ने कहा कि वे लोग गांव में तैनात रक्षा स्वयंसेवक थे।
तीन मैतेई लोगों की मौत की खबर के बाद, लोग बड़ी संख्या में इंफाल से क्वाक्टा की ओर आने लगे। रक्षा सूत्रों के अनुसार, जहां इस भीड़ के सदस्यों ने उखतामपाक में कुकी-जोमी के कुछ घरों में आग लगा दी, वहां कुकी-जोमी समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में मैइती लोगों के घरों के बाहर इकट्ठे हुए और क्षतिग्रस्त घरों को जलाने के लिए तोरबुंग की ओर बढ़ने के लिए एकत्र हुए।
दोनों जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में राज्य पुलिस कमांडो और केंद्रीय बल भी मौजूद थे। उन्होंने दिन भर गोलियों, मोर्टार, आंसू गैस ग्रेनेड, स्मोक ग्रेनेड और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। बाद में शाम को, इंफाल में भीड़ ने न्यू चेकऑन और लैंगोल क्षेत्रों में कुकी-जोमी समुदाय के सदस्यों के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग लगाना शुरू कर दिया। इसके बाद, अधिकारियों ने सूचित किया कि रविवार को इंफाल पूर्व और इंफाल पश्चिम जिलों में कर्फ्यू में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
हिंसा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने इम्फाल के दोनों जिलों में सुबह 10.30 बजे से कर्फ्यू लगा दिया। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इंफाल के दोनों जिलों में कर्फ्यू में ढील का समय घटाकर सुबह पांच से साढ़े दस बजे तक कर दिया गया है। पहले यह ढील सुबह पांच बजे से शाम छह बजे तक लागू थी।’’ एक बयान में, इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने राज्य सरकार से हिंसा को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में सवाल किया।
उसने कहा, ‘‘आईटीएलएफ यह जानना चाहेगा कि भीड़ द्वारा बंदूक और गोला-बारूद की लगातार लूट से उत्पन्न सुरक्षा खतरे से निपटने के लिए सरकारी एजेंसियां क्या कर रही हैं और सुरक्षा बल मणिपुर में जातीय संघर्ष के तीन महीने बाद भी सरकारी हथियारों की सुरक्षा करने में असमर्थ क्यों हैं।’’ फोरम के अनुसार, मई में इम्फाल और आसपास की घाटी में भीड़ द्वारा विभिन्न पुलिस थानों और शस्त्रागारों से 4,000 से अधिक हथियार और लाखों कारतूस “लूटे गए।’’