महाराष्ट्र की सियासत में बुधवार (18 फरवरी 2026) को एक बड़ा भूचाल आ गया, जिसने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खेमे में मायूसी और कांग्रेस में जश्न का माहौल बना दिया है। भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका में मेयर चुनाव से ठीक पहले बीजेपी को करारा झटका लगा है। पार्टी के 22 में से 9 पार्षदों ने बगावत करते हुए एक अलग गुट बना लिया है और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया है। इस बड़े उलटफेर के बाद अब कांग्रेस पार्टी के लिए अपना मेयर बनाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बता दें कि 90 सीटों वाली इस महानगरपालिका में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, लेकिन कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
बीजेपी और शिंदे गुट में दरार का फायदा कांग्रेस को
कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बुधवार को इस सियासी घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि अलग हुए बागी पार्षदों ने ‘भिवंडी सेक्युलर फ्रंट’ (BSF) का गठन किया है। इस फ्रंट के समर्थन से अब कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी (NCP-SP) गठबंधन ने बहुमत के जादुई आंकड़े (46 सीट) को पार कर लिया है। कांग्रेस नेता ने दावा करते हुए कहा कि, “9 पार्षदों ने हमारा समर्थन करने का फैसला किया है और बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं।” गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने पहले शिवसेना को समर्थन दिया था, लेकिन अब समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं और कांग्रेस अपना मेयर और डिप्टी मेयर बनाने की तैयारी में है।
किसके पास कितनी सीटें? देखें पूरा गणित
महाराष्ट्र में 15 जनवरी को हुए 29 महानगरपालिका चुनावों के नतीजों ने त्रिशंकु जनादेश दिया था। भिवंडी-निजामपुर के नतीजों पर नजर डालें तो कांग्रेस को सबसे ज्यादा 30 सीटें मिली थीं, जबकि बीजेपी 22 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर थी। इसके अलावा एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 12, शरद पवार गुट की एनसीपी-एसपी को 12, समाजवादी पार्टी को 6, कोनार्क विकास अघाड़ी को 4 और भिवंडी विकास अघाड़ी को 3 सीटों पर जीत मिली थी। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। अब बीजेपी के 9 पार्षदों के टूट जाने से सत्ता का पूरा गणित कांग्रेस के पक्ष में झुक गया है।