न्यूयॉर्क: वेनेजुएला के सत्ता से बेदखल किए गए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका की डेल्टा फोर्स द्वारा उठाए जाने के बाद पहली बार न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में पेश किया गया। कभी सख्त शासक रहे मादुरो अदालत में एक आम कैदी की तरह साधारण कपड़ों में दिखे, लेकिन उनके तेवर अब भी वही थे।
कोर्टरूम ड्रामा: 5 बड़ी बातें
- “मैं युद्ध बंदी हूं”: सुनवाई के दौरान मादुरो ने जज से कहा, “मैं एक किडनैप किया गया राष्ट्रपति हूं। मैं एक ‘युद्ध बंदी’ (Prisoner of War) हूं। मैंने कोई अपराध नहीं किया और मैं आज भी अपने देश का राष्ट्रपति हूं।” हालांकि, जज एल्विन हेलरस्टीन ने उन्हें टोकते हुए सिर्फ अपनी पहचान बताने को कहा।
- पत्नी की हालत खराब: मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोरेस के माथे पर पट्टी बंधी थी। उनके वकील ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान अमेरिकी सैनिकों की कार्रवाई में उनकी पसलियां टूट गई हैं। सिलिया ने भी कोर्ट में खुद को ‘फर्स्ट लेडी’ बताया।
- वकील का दांव: मादुरो के वकील ने तर्क दिया कि एक देश के राष्ट्रपति को ‘सप्रभु सुरक्षा’ (Sovereign Immunity) मिलती है, इसलिए उनकी गिरफ्तारी ही अवैध है।
- अमेरिका का जवाब: ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कोई युद्ध नहीं, बल्कि कानून लागू करने की प्रक्रिया थी। मादुरो पर नार्को-टेररिज्म (नशीले पदार्थों से जुड़ा आतंकवाद) और कोकीन तस्करी के गंभीर आरोप हैं।
- मौत की सजा संभव: मादुरो पर मशीनगन रखने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप भी हैं। अगर वे दोषी साबित होते हैं, तो उन्हें मौत की सजा तक हो सकती है।
अब आगे क्या?
मादुरो और उनकी पत्नी को एक फेडरल डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उन्होंने कोर्ट में सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष (Not Guilty) बताया है। यह मुकदमा लंबा चलने वाला है और यह तय करेगा कि क्या अमेरिका किसी दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष पर अपनी अदालत में मुकदमा चला सकता है।