ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की आग अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक पहुंच गई है। रविवार (1 मार्च 2026) सुबह खामेनेई की मौत की खबर आते ही शिया समुदाय में भारी गम और आक्रोश फैल गया। अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए हजारों की संख्या में शिया समुदाय के लोग पुराने लखनऊ की सड़कों पर उतर आए।
प्रदर्शन की मुख्य बातें: छोटे इमामबाड़े से उठा विरोध का स्वर
- विशाल मार्च: यह भारी विरोध प्रदर्शन शहर के ऐतिहासिक ‘छोटे इमामबाड़े’ (Chhota Imambara) से शुरू होकर लखनऊ के कई प्रमुख इलाकों की सड़कों तक पहुंचा।
- ‘खामेनेई अमर रहें’: लोगों के हाथों में खामेनेई की तस्वीरें थीं। सड़कों पर ‘खामेनेई अमर रहें’ और ‘अमेरिका-इजरायल मुर्दाबाद’ के जोरदार नारे गूंजते रहे। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई को ‘शहीद’ करार दिया।
- ‘विश्व युद्ध’ की चेतावनी: प्रदर्शन में शामिल शिया धर्मगुरुओं और वक्ताओं ने इस हमले को सीधे तौर पर ‘अमेरिकी आतंकवाद और साम्राज्यवाद’ का नतीजा बताया। उन्होंने इस वैश्विक तानाशाही की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि ऐसे हालात दुनिया को एक भयानक ‘विश्व युद्ध’ (World War 3) की तरफ धकेल रहे हैं।
‘मजलूमों की आवाज थे खामेनेई’
वक्ताओं ने अपने नेता को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जिंदगी भर जुल्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी और बिना किसी धर्म के भेदभाव के हमेशा मजलूमों (दबे-कुचलों) का साथ दिया। उनकी मौत कोई कमजोरी नहीं, बल्कि दुनियाभर के मजलूमों के लिए हिम्मत का नया सबब बनेगी। शिया समुदाय ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से इस ‘हत्या’ के खिलाफ न्याय की मांग की है।
चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात, खुफिया एजेंसियां अलर्ट
राजधानी में लोगों के इस भारी आक्रोश को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है:
- पुराने लखनऊ (Old Lucknow) और शहर के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
- पुलिस के आला अधिकारी खुद जुलूस के साथ मुस्तैद रहे और लोगों से शांति व संयम बनाए रखने की लगातार अपील करते दिखे।
- हालात को देखते हुए खुफिया तंत्र (Intelligence Agencies) भी एक्टिव हो गया है और जनता से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की सख्त हिदायत दी गई है।