उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मंगलवार (26 अगस्त 2025) को राज्य सरकार द्वारा आयोजित रोजगार मेले में बड़ी संख्या में युवा पहुंचे। तीन दिन में 50,000 नौकरियां देने और 11,000 से 41,000 रुपये के पैकेज वाली नौकरियों का दावा किया गया था। लेकिन मौके पर अव्यवस्था और भीड़ के चलते कई युवा नाराज दिखे और नारेबाजी करने लगे।
अखिलेश यादव का बीजेपी सरकार पर निशाना
मेले में लगे नारों पर समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
“भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ रोजगार मेले में निराश बेरोज़गार युवाओं द्वारा ‘हाय-हाय’ के नारे लगाना चिंताजनक है। कूड़े में बिखरे बायोडाटा सारा हाल बयान कर रहे हैं। सच ये है कि युवाओं को समझ में आ गया है कि नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं! भाजपा जाए तो नौकरी आए!”
मेले में सीएम योगी का बयान
रोजगार मेले के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को भरोसा दिलाया कि:
- यूपी में काम करने वाले युवाओं को न्यूनतम वेतन की गारंटी मिलेगी।
- नियुक्ति देने वाली कंपनियों के अतिरिक्त चार्ज सरकार वहन करेगी।
- रोजगार मेले में नई टेक्नोलॉजी की मांग के अनुरूप ट्रेनिंग और कोर्स भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
- सीएम ने कहा, “युवा अपार ऊर्जा का स्रोत हैं, और सबसे अधिक युवा आबादी यूपी का सौभाग्य है।”
क्यों उठे सवाल?
हालांकि कार्यक्रम में रोजगार के बड़े दावे किए गए, लेकिन अव्यवस्था और बायोडाटा के कूड़े में बिखरे मिलने जैसी घटनाओं ने युवाओं की नाराजगी को हवा दी। अब सवाल यह है कि क्या रोजगार मेले के वादे हकीकत में बदल पाएंगे या सिर्फ चुनावी चर्चा तक सीमित रहेंगे?