लोकसभा में रेल संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा, जानें किस सांसद ने क्या कहा

लोकसभा में बुधवार को रेल संशोधन विधेयक पर चर्चा हुई. कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने रेलवे के निजीकरण की आशंका जताई. सांसदों ने कहा कि यात्री किराया, सुविधा और सुरक्षा पर सरकार को ज्यादा ध्यान देना चाहिए. कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा कि इस विधेयक के पास होने से रेलवे की स्वायत्तता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इससे निजीकरण की संभावना बढ़ेगी. रेल एक्ट-1989 में शामिल होने वाले नए प्रावधानों से निजीकरण का रास्ता साफ हो सकता है.मनोज कुमार ने कहा कि रेलवे की संपत्ति को निजी हाथों में सौंपा जा सकता है. निजी लोग आएंगे तो मनमानी करेंगे. इस तरह यात्री किराया अप्रत्याशित तरीके से बढ़ सकता है. विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा, यह विधेयक रेल में व्यापक सुधार और आधुनिकीकरण के लिए लाया गया है. इससे व्यवस्था में सुधार होगा.
रेलवे में बदलाव देखने को मिल रहा है
अपराजिता ने कहा कि रेलवे के कुछ पुराने कानूनों को खत्म करने का सुझाव 1986 में एक जेपीसी ने दिया था. हालांकि, उस समय इसे नहीं माना गया था. प्रधानमंत्री मोदी की सुधारों की प्रतिबद्धता के तहत रेलवे में बदलाव देखने को मिल रहा है. चर्चा में बीजेपी सांसद रवि किशन ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कहा था कि देश को पुराने कानूनों से मुक्ति दिलाई जाएगी. यह विधेयक उसी क्रम में लाया गया है.
टिकट कैंसल करने पर पूरा पैसा मिलता है
रवि किशन ने दावा किया, रेलवे में टिकट बहुत सस्ती है. टिकट निरस्त करने पर यात्रियों को पूरा पैसा मिलता है. बुलेट ट्रेन के लिए 300 किलोमीटर की पटरी बिछ चुकी है. इसका विकसित भारत के सपने में का बहुत महत्व है. वहीं, सपा सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि सरकार को रेलवे को निजीकरण की तरफ नहीं ले जाना चाहिए.
जवाबदेही तय करने की जरूरत
चर्चा में हिस्सा लेते हुए जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने मांग की कि कोरोना काल में बंद की गईं रेलगाड़ियों को फिर से चलाया जाए. टीडीपी सांसद हरीश बालयोगी ने कहा कि रेल की पहुंच का दायरा बढ़ाने, किफायती किराया और जवाबदेही तय करने की जरूरत है. कांग्रेस सांसद संजना जाटव ने आरोप लगाया कि इस सरकार में रेलवे की सुरक्षा में बार-बार समझौता किया गया है.

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