
विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की ओर से लोकसभा के उपसभापति पद की मांग की गई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ‘इंडिया’ को डिप्टी स्पीकर की पोस्ट नहीं मिली तो वे लोकसभा में अध्यक्ष पद के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकते हैं।मालूम हो कि 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 24 जून से शुरू होने वाला है जो 3 जुलाई को समाप्त होगा। इस तरह यह 9 दिवसीय विशेष सत्र रहने वाला है। इस दौरान अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 26 जून से शुरू होगी। 17वीं लोकसभा में भाजपा के ओम बिरला अध्यक्ष थे, जबकि उपसभापति का पद खाली था।
हाल ही में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 233 सीटों पर जीत दर्ज की। इस तरह बीजेपी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रहा। हालांकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सहित हिंदी पट्टी वाले इलाकों में भगवा दल को भारी नुकसान झेलना पड़ा। ध्यान रहे कि गठबंधन वाली सरकार केंद्र की सत्ता में 10 साल बाद लौटी है। इस बार विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन भी मजबूत स्थिति में है। अब लोकसभा अध्यक्ष पद पर हर किसी की नजर टिकी हुई है। एनडीए के घटक दल भी इस पद पर नजर गड़ाए हुए हैं।
26 जून को लोकसभा के नए अध्यक्ष का चुनाव
गौरतलब है कि लोकसभा 26 जून को अपने नए अध्यक्ष का चुनाव करेगी। सदन के सदस्य उम्मीदवारों के समर्थन में प्रस्ताव के लिए एक दिन पहले दोपहर 12 बजे तक नोटिस दे सकते हैं। अध्यक्ष के चुनाव के लिए तय तिथि से एक दिन पहले दोपहर 12 बजे से पहले कोई भी सदस्य अध्यक्ष पद के लिए किसी अन्य सदस्य के समर्थन में प्रस्ताव के लिए महासचिव को लिखित रूप से नोटिस दे सकता है। नोटिस में बताया गया कि मौजूदा मामले में अध्यक्ष के चुनाव के लिए प्रस्ताव के वास्ते नोटिस मंगलवार, 25 जून दोपहर 12 बजे से पहले दिए जा सकते हैं। सत्र के पहले दो दिन नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के लिए समर्पित होंगे। अध्यक्ष के चुनाव के लिए 26 जून की तिथि तय की गई है, जबकि 27 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी।
अध्यक्ष पद को लेकर क्या है चुनावी प्रक्रिया
प्रस्ताव के लिए नोटिस का समर्थन किसी तीसरे सदस्य की ओर से किया जाना चाहिए। साथ ही, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार की ओर से यह बयान भी दिया जाना चाहिए कि वह निर्वाचित होने पर अध्यक्ष के रूप में काम करने के लिए तैयार है। लोकसभा सचिवालय ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि कोई सदस्य अपना नाम प्रस्तावित नहीं कर सकता है या अपने नाम वाले किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर सकता है। अगर कोई प्रस्ताव पारित (अपनाया) होता है, तो कार्यवाही की अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति (प्रोटेम स्पीकर) यह घोषणा करेगा कि पारित किए गए प्रस्ताव में प्रस्तावित सदस्य को सदन का अध्यक्ष चुना गया है।