सबसे बड़ा धार्मिक समागम

कुंभ मेला सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि यह भारत की प्राचीन पौराणिक कथाओं से जुड़ी एक अद्भुत परंपरा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसकी जड़ें सागर मंथन की कथा से जुड़ी हैं, जब देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था। मंथन से निकले अमृत कलश को लेकर जब देवताओं और दानवों के बीच संघर्ष हुआ,तब अमृत की कुछ बूंदें भारत की चार पवित्र नदियों के तटों पर गिरीं। ये चार बूंदें प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में गिरीं। इसलिए, हर बार जब ग्रह-नक्षत्र की स्थिति अनुकूल होती है, तो इन चार स्थानों पर कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। इनमें से प्रयाग को तीर्थराज भी कहा जाता है और यहां हर बारह साल में महाकुंभ मेला लगता है। कुंभ मेले का पहला लिखित प्रमाण भगवत पुराण में मिलता है। कुंभ मेले का एक और लिखित प्रमाण चीनी यात्री ह्वान त्सांग (या ज़ुआनज़ांग) के यात्रा विवरण में मिलता है, जिन्होंने 629-645 ईस्वी में हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत का दौरा किया था. साथ ही, समुद्र मंथन के बारे में भी भगवत पुराण, विष्णु पुराण, महाभारत और रामायण में उल्लेख किया गया है.कुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है। ये मेला हर 12 साल में चार प्रमुख स्थानों प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन पर आयोजित किया जाता है. हर बार लाखों लोग इसमें शामिल होते हैं और पवित्र नदियों में स्नान करते है.2025 के कुंभ मेले की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार महाकुंभ मेला 13 जनवरी 2025 से पौष पूर्णिमा स्नान के साथ शुरू होगा और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होगा. इस दौरान 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 29 जनवरी को मौनी अमावस्या और 3 फरवरी को बसंत पंचमी भी मनाई जाएगी। ये सभी आयोजन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर होंगे.इस महीने भर चलने वाले आयोजन में तीर्थयात्रियों के रहने के लिए अलग से तंबू लगाकर एक छोटा सा शहर बसा दिया जाता है। यहां रहने की सभी सुविधाएं जुटाई जाती हैं। प्रशासन, स्थानीय अधिकारियों और पुलिस की मदद से इस आयोजन को व्यवस्थित किया जाता है। कुंभ मेले में दूर-दूर के जंगलों, पहाड़ों और गुफाओं से साधु-संत आते हैं। इन साधुओं के शरीर पर भभूति लिपटी होती है, बाल लंबे होते हैं और वे चीतल की खाल ओढ़ते हैं. स्नान के लिए विभिन्न नाग साधुओं के अखाड़े भव्य जुलूस के रूप में संगम तट पर पहुंचते हैं.2019 का कुंभ मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन ही नहीं था, बल्कि एक ऐसा आयोजन था जिसने दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया। इस मेले ने तीन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए- सबसे बड़ी यातायात और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था, सबसे बड़ा पेंटिंग अभियान, सबसे बड़ा स्वच्छता और कचरा निपटान तंत्र.ये तीनों रिकॉर्ड्स दिखाते हैं कि भारत कैसे आधुनिक तरीके से धार्मिक आयोजन कर सकता है. ये रिकॉर्ड्स सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *