महिला आरक्षण कानून को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार मौजूदा सदन की संख्या और परिसीमन की व्यवस्था के आधार पर भी महिलाओं को एक-तिहाई सीटें आवंटित कर सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार को ऐसा करने से कौन रोक रहा है? खरगे ने इसे विपक्ष को बदनाम करने और उसकी छवि खराब करने की रणनीति बताया।
मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाए आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि अगर कांग्रेस और विपक्ष महिला आरक्षण के विरोध में होते, तो वे पहले इस कानून को पारित कराने की कोशिश क्यों करते? उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर जनता को गुमराह करने और झूठ बोलकर अपना एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। खरगे के मुताबिक, सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल विपक्ष की छवि खराब करने के लिए कर रही है।
केंद्र सरकार पर विपक्ष को बदनाम करने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष को गलत तरीके से पेश करने और उसे बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस महिला आरक्षण कानून के खिलाफ होती, तो वह इसे पहले पारित कराने का प्रयास क्यों करती? खरगे के इन बयानों से महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
क्या है महिला आरक्षण कानून?
भारत में महिला आरक्षण कानून को नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के नाम से जाना जाता है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लगभग 33 प्रतिशत यानी एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। दिल्ली विधानसभा भी इस कानून के दायरे में आती है। इस कानून का उद्देश्य विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।