कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में प्रस्तावित संशोधन को लेकर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजनीतिक दल चुनावी गतिविधियों में व्यस्त हैं, तो सरकार इस मुद्दे पर जल्दबाजी क्यों कर रही है।
इस संबंध में खरगे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र लिखते हुए सुझाव दिया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को पूरा होने के बाद ही बैठक आयोजित की जाए। यह पत्र केंद्रीय मंत्री की ओर से भेजे गए उस प्रस्ताव के जवाब में लिखा गया है, जिसमें अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए संशोधन पर चर्चा का आग्रह किया गया था।
विपक्ष ने पहले भी दिया था सुझाव
विपक्षी दलों ने 24 मार्च 2026 को भी एक संयुक्त पत्र लिखकर आग्रह किया था कि महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक चुनाव समाप्त होने के बाद बुलाई जाए। खरगे ने अपने पत्र में बताया कि उन्हें सरकार का पत्र 26 मार्च 2026 को प्राप्त हुआ।
‘संविधान संशोधन के बाद इतनी जल्दबाजी क्यों?’
खरगे ने लिखा कि वह यह समझ नहीं पा रहे हैं कि संविधान संशोधन अधिनियम पारित होने के लगभग 30 महीने बाद सरकार इसमें बदलाव करने की इतनी जल्दी क्यों दिखा रही है। उन्होंने कहा कि सभी दल इस समय चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, इसलिए बैठक चुनाव खत्म होने के बाद करना अधिक उचित होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद बैठक होने से 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले संशोधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। खरगे ने याद दिलाया कि 21 सितंबर 2023 को राज्यसभा में चर्चा के दौरान उन्होंने स्वयं इस कानून को तुरंत लागू करने की मांग की थी, लेकिन उस समय सरकार सहमत नहीं हुई थी। उन्होंने फिर से अनुरोध किया कि 29 अप्रैल 2026 के बाद किसी भी समय सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
राजनीतिक स्तर पर बढ़ी बातचीत
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आम सहमति बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों और कुछ विपक्षी क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें भी की हैं।
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023
साल 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह कानून परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकेगा।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित ढांचे के तहत लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 816 हो सकती है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।