Kashi Vishwanath Temple में स्थानीय श्रद्धालुओं को बड़ी राहत! CM योगी के निर्देश पर बदला दर्शन नियम, अब पूरे दिन मिलेगी यह सुविधा

वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद मंदिर प्रशासन ने वाराणसी के निवासियों के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था को और आसान बनाने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब स्थानीय लोग निर्धारित समय की बजाय पूरे दिन विशेष प्रवेश द्वार से मंदिर में दर्शन के लिए जा सकेंगे।

CM योगी के निर्देश के बाद बदली गई व्यवस्था

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी दौरे के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन को स्थानीय श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने वाराणसी के निवासियों के लिए नई दर्शन व्यवस्था लागू करने की घोषणा की।

उप जिलाधिकारी एवं मंदिर अधिकारी शंभू शरण ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं को अधिक सुविधाजनक तरीके से मंदिर में प्रवेश देने का निर्णय लिया गया है।

पहले क्या थी व्यवस्था?

मंदिर ट्रस्ट ने वर्ष 2024 में वाराणसी के स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए ‘काशी द्वार’ (गेट संख्या 4B) से प्रवेश की विशेष व्यवस्था शुरू की थी।

पहले स्थानीय निवासी वैध पहचान पत्र दिखाकर केवल सुबह 4:00 बजे से 5:00 बजे तक और शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे तक ही इस गेट के माध्यम से मंदिर में प्रवेश कर सकते थे।

अब सुबह से रात तक मिलेगा प्रवेश

नई व्यवस्था के तहत वाराणसी के निवासी वैध पहचान पत्र दिखाकर सुबह 4:15 बजे से रात 10:45 बजे तक काशी द्वार (गेट संख्या 4B) से मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे।

हालांकि मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख त्योहारों और विशेष धार्मिक आयोजनों के दौरान, जब श्रद्धालुओं की संख्या अत्यधिक होती है, तब यह विशेष सुविधा लागू नहीं रहेगी।

भीड़ प्रबंधन के साथ श्रद्धालुओं को मिलेगी राहत

मंदिर अधिकारी शंभू शरण के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा उपलब्ध कराना और देश के सबसे व्यस्त तीर्थस्थलों में से एक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भीड़ प्रबंधन को और बेहतर बनाना है।

माना जा रहा है कि इस फैसले से स्थानीय श्रद्धालुओं को लंबी प्रतीक्षा से राहत मिलेगी, मंदिर प्रशासन पर भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु रूप से संचालित की जा सकेगी।

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