मोदी-बाइडेन की महामुलाकात से चीन-पाकिस्तान क्यों परेशान?

स वक्त पूरी दुनिया की सत्ता का केंद्र भारत और उसकी राजधानी दिल्ली है. इस वक्त पूरी दुनिया के कैमरे जी-20 का अद्भुत आयोजन कर रहे भारत के विकास और विश्वास को कवर कर रहे हैं. लेकिन इस महामुलाकात से दो देश चीन और पाकिस्तान परेशान है और छुप-छुपकर यह देख रहे हैं.

क्योंकि यहां से कोई ऐसा एजेंडा तय हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर हो.

ऐसे समय में जब दुनिया की 85% अर्थव्यवस्था वालेG20के देश एक मंच पर बैठने वाले हैं, उससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात को लेकर चीन और पाकिस्तान परेशान है.

अगर सिर्फ आंकड़ों की बात करें तो भारत और अमेरिका के बीच 128 अरब डॉलर का व्यापार है, जबकि 21 अरब डॉलर का रक्षा संबंध है. वैसे नरेंद्र मोदी और जो बाइडेन की कैमस्ट्री इतनी गजब है कि दोनों नेता पिछले 2 साल में 7 बार मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन ये दोस्ती सिर्फ दोनों नेताओं की नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच है.

अमेरिका में 44 लाख रहते हैं भारतीय

अगर भारत और अमेरिका के रिश्तों की बात करें तो अमेरिका में करीब 44 लाख भारतीय रहते हैं, जिसमें 12 लाख 80 हज़ार NRI हैं.
– 38% डॉक्टर्स हैं
– 12% साइंटिस्ट हैं
– 36% नासा वैज्ञानिक हैं
– 34% माइक्रोसॉफ्ट में हैं
– 28% IBM में हैं

इतना ही नहीं भारत के लोग अमेरिका में रहने वाले सबसे ताकतवर प्रवासी हैं, जो अब अमेरिका के सबसे बड़े पद राष्ट्रपति पद पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. अगले चुनाव के लिए निकी हेली और विवेक रामास्वामी इस पद की उम्मीदवारी की होड़ में हैं.

वैसे अमेरिका में भारतीयों को रिझाने की कोशिश भी कम नहीं है, पिछले कुछ समय से अमेरिका में भारतीय त्योहार दिवाली को खास महत्व दिया जा रहा है, दिवाली पर न्यूयॉर्क समेत कई राज्यों में छुट्टी दी जाती है.

दोनों देशो के बीच है काफी पुराना रिश्ता

दरअसल, दोनों देशों के रिश्ते का इतिहास भी काफी पुराना है. अमेरिका ने भारत की तब मदद की थी जब चीन हमारी जमीन पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ रहा था. ये बात 1962 की भारत-चीन जंग की है, जब चीन ने 20 अक्टूबर को लद्दाख और मैकमोहन लाइन पर एक साथ हमला कर दिया था.

उस दौरान 28 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने PM नेहरू को एक पत्र लिखा था और हर संभव मदद का ऐलान किया था. कुछ ही दिन बाद भारत को अमेरिका US एयरफोर्स के बोइंग 707 एयरक्राफ्ट से मदद भेजी थी. अब 21वीं सदी में एक बार फिर से चीन दुनिया के तमाम देशों के साथ कूटनीतिक टकराव पैदा कर रहा है और इस बार भी भारत और अमेरिका एक दूसरे के साथ हैं.

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