
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर 6 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी. इस बार बुधवार के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रोहिणी नक्षत्र तथा वृषभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा.
जन्माष्टमी पर 30 साल बाद ग्रह नक्षत्रों का भी विशिष्ट संयोग बन रहा है. पंचांग के अनुसार यह स्थिति श्रीकृष्ण जन्म के लिए शुभ व भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है. श्री कृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी युक्त मध्य रात्रि में विशेष मानी जाती है. इस दृष्टि से स्मार्त मतानुसार तथा पंचांग की गणना के अनुसार एवं गार्गव संहिता में तिथि नक्षत्र आदि का क्रम का विस्तार से ब्योरा दिया गया है. 6 सितंबर दिन बुधवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाना शास्त्रगत रहेगा.
अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र का बन रहा संयोग
श्रीकृष्णजन्माष्टमी 6 सितम्बर दिन बुधवार की रात 7 बजकर 57 मिनट के बाद से अष्टमी तिथि लग जायेगी. इस दिन दोपहर 02 बजकर 39 मिनट से रोहिणी नक्षत्र भी प्रारम्भ हो जायेगी. इस प्रकार आज अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र का संयोग एक साथ मिलने के कारण ‘जयन्ती’ नामक योग में स्मार्त्त गृहस्थ तथा अन्य सभी लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनायेंगे. अपने को विशुद्ध ‘वैष्णव’ मानने वाले उदय कालिक अष्टमी तिथि एवं औदायिक रोहिणी नक्षत्र मिलने से 7 सितम्बर गुरुवार को श्रीकृष्णजन्माष्टमी का व्रत-पर्व मनायेंगे. शास्त्र में इन दोनों के पक्ष में पर्याप्त प्रमाण प्राप्त होते हैं.
पूजन का फल देने वाला योग
पंचांग की गणना के अनुसार देखें तो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर बुधवार का दिन एवं मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र का अनुक्रम रहने से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. इस दिन चंद्रमा अपने उच्च अंश में वृषभ राशि के साथ रहेंगे और रोहिणी चंद्रमा की पत्नी भी है. चूंकि चंद्र उच्च में होकर केंद्र त्रिकोण को साधेंगे. यह योग पूजन का विशेष फल देने वाला है. इस दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग में विशिष्ट पूजन साधना आराधना की जा सकती है.