UP News: कैराना से सपा सांसद इकरा हसन और समाजवादी पार्टी के अन्य प्रतिनिधियों को बरेली में हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा करने से रोक दिए जाने के बाद उन्होंने राज्य सरकार पर कड़ा आरोप लगाया और इसे “अघोषित आपातकाल” बताया।
दौरे से रोकने पर गुस्से का इज़हार
इकरा हसन ने कहा, ‘‘मैं उत्तर प्रदेश की निवासी हूं और वहां से निर्वाचित जनप्रतिनिधि हूं. हमने बरेली में हुई हिंसा की घटनाओं के बारे में सुना और वहां जाकर लोगों से बात करना चाहते थे यह समझने के लिए कि उनकी समस्याएं क्या हैं और सरकार उनके साथ कैसा व्यवहार कर रही है. लेकिन हमें रोक दिया गया.’’ उन्होंने बताया कि सपा प्रतिनिधिमंडल बरेली की स्थिति को समझने और स्थानीय लोगों की बात सुनने के लिए गया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें शहर में प्रवेश करने से मना कर दिया।
‘अघोषित आपातकाल’ का दावा
इकरा हसन ने आगे कहा, ‘‘ऐसा कोई कानून नहीं है जो हमें देश में मुक्त रूप से घूमने से रोक सके. शहर में कोई लिखित नोटिस (प्रवेश पर रोक लगाने वाला) भी नहीं था. इसलिए, यह साफ तौर पर उत्तर प्रदेश में अघोषित आपातकाल की स्थिति है.’’ उनका कहना था कि बिना किसी औपचारिक कारण के जनप्रतिनिधियों को राजनैतिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
हम लौटकर आएंगे — सपा की चेतावनी
सपा सांसद ने स्पष्ट किया, ‘‘हम पीछे नहीं हटेंगे. हम वहां जाएंगे. आज नहीं तो कल या 10 दिन में. हम वहां जाएंगे और इस सरकार के एजेंडे का पर्दाफाश करेंगे.’’ इकरा हसन ने कहा कि पार्टी के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल फिर से बरेली जाने का प्रयास करेगा और स्थानीय लोगों से बातचीत कर स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगा।
पृष्ठभूमि — बरेली में पहले क्या हुआ था
बरेली के कोतवाली इलाके में 26 सितंबर को एक मस्जिद के बाहर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था। जुमे की नमाज के बाद एक पोस्टर को लेकर भीड़ जमा हुई और कई लोग घायल हुए थे। प्रशासन ने सूरत को नियंत्रित करने के लिए कुछ पाबंदियां और इंटरनेट सेवा पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे, जिसके बीच सपा प्रतिनिधिमंडल के शहर में प्रवेश पर रोक लगी।