वंदे मातरम् का विरोध नहीं करें मुसलमान, ये इस्लाम के खिलाफ नहीं, कांग्रेस नेता हुसैन दलवई का बड़ा बयान

लोकसभा में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चल रही 10 घंटे की चर्चा के बीच कांग्रेस के नेता हुसैन दलवई ने एक बड़ा और भावुक बयान दिया है। उन्होंने भारत के मुसलमानों से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का विरोध न करें, क्योंकि यह इस्लाम के खिलाफ नहीं है।

मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि, “वंदे मातरम् वह गीत है, जिसे लेकर देश के न जाने कितने ही लोगों ने अंग्रेजों की लाठियां खाईं।” उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि यह बात उन्हें याद रखना जरूरी है।

‘मैं मुसलमान हूं, पर वंदे मातरम् गाता हूं’

हुसैन दलवई ने कहा कि, “जब हम बच्चे थे, तब से ही स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ पढ़ा जा रहा है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि मैंने एक बार विधान परिषद में यह मुद्दा उठाया था और कहा था कि वंदे मातरम् का विरोध करने की कोई जरूरत नहीं है।

दलवई ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा, “मैं मुसलमान हूं, लेकिन मैं वंदे मातरम् गाता हूं। यह मेरे धर्म के खिलाफ नहीं है।” उन्होंने याद दिलाया कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई के दौरान लोग वंदे मातरम् बोलते थे और पंडित नेहरू से लेकर महात्मा गांधी तक ने वंदे मातरम् बोला।

बाद के छंदों पर है आपत्ति, बीजेपी पूरा गाने पर दे रही जोर

कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि मुसलमानों का विरोध गीत के कुछ छंदों को लेकर है, न कि पहले छंद को लेकर। उन्होंने कहा कि पहला छंद किसी भी तरह से इस्लाम के खिलाफ नहीं है, लेकिन बाद के छंदों में ऐसे संदर्भ हैं जो मुसलमानों के खिलाफ बोलते हैं और सिर्फ हिंदू मान्यताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं, आपत्ति यहीं है।

उन्होंने कहा कि, “बाद के तीन छंद यहां नहीं गाए जाते, सिर्फ पहले छंद को राष्ट्रगीत के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। मुसलमानों को यह समझना चाहिए, लेकिन बीजेपी इस बात पर जोर दे रही है कि वंदे मातरम् पूरा गाया जाना चाहिए।”

इसके अलावा, दलवई ने सनातन धर्म और हिंदू धर्म पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सनातन धर्म का मतलब ब्राह्मणवादी विचारधारा है, जबकि हिंदू धर्म एक उदार आस्था है और सबको साथ लेकर चलने वाला धर्म है।

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