
7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए भीषण हमले के बाद हमास के करीबी सहयोगी हिजबुल्लाह ने भी बड़ी खतरनाक प्लानिंग की थी। हिजबुल्लाह की योजना इजरायल पर 7 अक्टूबर से भी बड़े हमले की थी। दरअसल हिजबुल्लाह लंबे समय से इजरायल के गलील क्षेत्र पर कब्जा करना चाहता है।
इसके लिए उसने “गलील पर विजय” (Conquer the Galilee) नाम से एक ऑपरेशन भी शुरू किया हुआ है। गलील इजरायल का वह इलाका है जिसे ‘यीशु मसीह के घर’ से रूप में जाना जाता है। यह यहूदियों के अलावा, ईसाइयों के लिए भी बेहद पवित्र स्थान है।
हिजबुल्लाह की योजना इजरायल के उत्तरी क्षेत्र गलील पर कब्जा करने की थी, जिसमें हिजबुल्लाह की ताकतवर और प्रशिक्षित “रदवान फोर्सेस” मुख्य भूमिका निभा रही थीं। हाल ही में इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने ट्वीट करके बताया कि हिजबुल्लाह के ऑपरेशंस यूनिट का प्रमुख और रदवान फोर्सेस का कमांडर इब्राहीम अकिल एक खुफिया हमले में मारा गया। अकिल और उसके साथ कई उच्चस्तरीय अधिकारी भी इस हमले में मारे गए।
“गलील पर विजय” योजना क्या थी?
हिजबुल्लाह की यह योजना इजरायल के गलील क्षेत्र पर कब्जा करने और वहां के नागरिकों को मारने और बंधक बनाने की थी। यह साजिश आतंकवादी संगठन द्वारा इजरायल के अंदर घुसपैठ कर गलील की नागरिक बस्तियों पर हमला करने की थी, जैसा कि 7 अक्टूबर के हमले में देखा गया था। हिजबुल्लाह की योजना में इजरायली गांवों और शहरों में घुसकर आम नागरिकों का अपहरण और हत्या शामिल थी। इसे हिजबुल्लाह के एक बड़े सामरिक हमले के रूप में देखा जा रहा है, जो इजरायल के सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता था।
रदवान फोर्सेस और उनका महत्व
हिजबुल्लाह की रदवान फोर्सेस उसकी सबसे खतरनाक और प्रशिक्षित सेना है। यह विशेष सेना कई वर्षों से इजरायल विरोधी गतिविधियों में शामिल रही है और इसे सीरिया में भी सक्रिय रूप से देखा गया है। रदवान फोर्सेस का मुख्य कार्य इजरायल के अंदर घुसपैठ करना और हमले की योजना बनाना था।
इब्राहीम अकिल इस यूनिट का नेतृत्व कर रहा था। उसने गलील योजना के तहत बड़े स्तर पर इजरायल के क्षेत्रों में घुसपैठ करने और हमलों को अंजाम देने का खाका तैयार किया था। अकिल का मारा जाना हिजबुल्लाह के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस तरह की योजनाएं फिर से बनने की कोशिश की जा सकती हैं।
इजरायली डिफेंस फोर्सेस की कार्रवाई
IDF ने इस हमले को “टारगेटेड इंटेलिजेंस-बेस्ड स्ट्राइक” कहा है, यानी यह पूरी तरह से खुफिया जानकारी पर आधारित था। इसमें इब्राहीम अकिल के साथ रदवान फोर्सेस के कई अन्य उच्चस्तरीय अधिकारी भी मारे गए। यह हमला हिजबुल्लाह की इस बड़ी साजिश को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम था। इजरायल के लिए गलील की सुरक्षा हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, और इस हमले ने यह साबित कर दिया कि हिजबुल्लाह की योजनाओं से इजरायल को खतरा लगातार बना हुआ है।
“गलील पर विजय” की जड़ें
गलील पर कब्जा करने की योजना का उद्देश्य सिर्फ इजरायल के क्षेत्रों पर नियंत्रण नहीं था, बल्कि इजरायल की जनता के मनोबल को गिराना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि को नुकसान पहुंचाना भी था। हिजबुल्लाह और उसके समर्थक संगठनों की यह योजना इजरायल के खिलाफ युद्ध में नई रणनीति के रूप में देखी जा रही है, जिसमें न केवल सैन्य हमले बल्कि जनसंहार और डर फैलाने के तरीकों का भी उपयोग शामिल है।
गलील का इतिहास: सभ्यताओं का संगम
गलील (Galilee) इजरायल के उत्तरी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसका इतिहास कई हजार साल पुराना है और इसे बाइबल, यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, और इस्लामी इतिहास में एक प्रमुख स्थान प्राप्त है। गलील पहाड़ों, उपजाऊ घाटियों, और झीलों से घिरा हुआ एक सुंदर इलाका है, जो विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों का मिलन बिंदु रहा है।
प्राचीन काल
गलील का सबसे प्राचीन उल्लेख बाइबल और यहूदी धर्मग्रंथों में मिलता है। यह क्षेत्र कई हजार साल पहले से आबाद था और यहां कनानी, हित्ती, और अन्य प्राचीन सभ्यताएं निवास करती थीं। 12वीं शताब्दी ईसा पूर्व में यहूदी जनजातियों ने इस क्षेत्र पर कब्ज़ा किया। गलील को यहूदी धर्म में पवित्र माना जाता है, क्योंकि यह कई धार्मिक घटनाओं और व्यक्तियों से जुड़ा हुआ है।
यहूदी और इजरायल साम्राज्य
ईसा पूर्व 10वीं शताब्दी में, राजा सोलोमन के शासनकाल के दौरान, गलील इजरायल के विशाल साम्राज्य का हिस्सा था। इसके बाद, 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व में यह क्षेत्र असिरियाई साम्राज्य द्वारा जीत लिया गया, जिससे यहां की जनसंख्या और संस्कृति में भारी परिवर्तन आया। गलील का यह क्षेत्र व्यापार और यातायात का प्रमुख केंद्र बना, जो विभिन्न संस्कृतियों और व्यापारियों के लिए आकर्षण का केंद्र था।
ईसाई धर्म का उदय
गलील ईसाई धर्म के इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। यह वही क्षेत्र है जहां यीशु मसीह के जीवन का बड़ा हिस्सा बीता और उन्होंने अपनी शिक्षाएं दीं। नाजरेथ भी गलील के अंदर ही स्थित है, जोकि यीशु मसीह का जन्मस्थान माना जाता है। इसके अलावा, गलील की झील के पास भी यीशु ने अपने अनुयायियों के साथ कई चमत्कार किए और उपदेश दिए, जिसे आज भी ईसाई धर्म में पवित्र स्थान के रूप में देखा जाता है।