
अपर जिलाधिकारी (वि/रा) शुभांगी शुक्ला ने बुधवार को बताया कि विगत दिवसों में देखा गया है कि जनपद में डूबने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। गंगा दशहरा 16 जून को है, इस दिन स्नान का महत्व है।वहीं लोग बढ़ती गर्मी से राहत पाने के लिए भी घाटों आदि में स्नान करने के दौरान हादसे का शिकार हो रहे हैं। इन बहुमूल्य जिंदगियों को बचाने के लिए शासन ने एडवायजरी जारी की है।
डूबे हुए व्यक्ति का ऐसे करें उपचार
– सबसे पहले देख लें कि डूबे हुये व्यक्ति के मुंह व नाक में कुछ फंसा तो नहीं है, यदि है तो उसे निकाल दें
– यदि डूबा हुए व्यक्ति को खांस/बोल/सांस ले सकने की स्थिति में है तो उसे ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें
– मूर्छा, बेहोशी आने पर सांस देने को छाती में दबाव की प्रक्रिया शुरू करें
– नाक व मुंह पर अंगुलियों के स्पर्श से जांच कर लें कि सांस चल रही है या नहीं
– नब्ज की जांच करने के लिए गले के किनारे के हिस्सों को अंगुलियों से छूकर जानकारी प्राप्त करें कि नब्ज चल रही अथवा नहीं
– मुंह से लगाकर दो बार भरपूर सांस दें व 30 बार छाती के बीच में दबाव दें।
इन बातों पर करें अमल
– खतरनाक घाटों के किनारे न स्वयं जाएं न बच्चों को भेजें
– बच्चों को घाटों के तेज बहाव में स्नान करने से रोकें
– बच्चों को पुल/पुलिया, ऊंचे टीले/पेड़ से पानी में कूद कर स्नान करने से रोकें
– यदि बहुत ही आवश्यक हो तो नदी के किनारे जाएं, लेकिन नदी में उतरते समय गहराई का ध्यान रखें
– डूबते व्यक्ति को धोती/ साड़ी/ रस्सी/ बांस की सहायता से बचायें
– यदि तैरना नहीं जानते हैं तो पानी में न जाएं, सहायता के लिए किसी को पुकारें
– गांव या गलियों में डूबने की घटना होने पर आस-पास के लोग एकत्रित होकर ऐसी दुखद घटना की चर्चा करें कि किस कारण से घटना हुई।