जी 20 बैठक से खुला यह गलियारा कैसे ऐतिहासिक, भारत के लिए कितना बड़ा मौका

मेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जी-20 के साझेदारों ने शनिवार को एक शिपिंग कॉरिडोर की योजना बनाने की योजना बनाई। यह भारत को मध्य पूर्व और अंततः यूरोप से जोड़ेगा। यह शिपिंग कॉरिडोर ग्लोबल ट्रेड के लिए गेम चेंजर हो सकता है।

इंडो-पैसिफिक पॉलिसी के सीनियर अमेरिकी अधिकारी कर्ट कैंपबेल ने चर्चा के बाद पत्रकारों को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बाइडन और पीएम मोदी ने शुक्रवार को करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस बातचीत में बुनियादी ढांचे और संचार से जुड़ी एक बड़ी सफलता भी शामिल रही। यह भारत को पश्चिम एशिया और यूरोप से जोड़ेगी।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार को नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाले मल्टीनेशनल रेल और बंदरगाह समझौते की घोषणा की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका, सऊदी अरब, यूरोपीय संघ, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य यूरोप और भारत के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। यह समझौता आखिर कैसे मील का पत्थर होने जा रहा है, आइए समझते हैं…

क्या है रेल और बंदरगाह डील
इस समझौते से क्षेत्र के निम्न और मध्यम आय वाले देशों को फायदा पहुंचेगा। इसके साथ ही ग्लोबल कॉमर्स में पश्चिम एशिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन फाइनर ने जी-20 सम्मेलन में इस बारे में जानकारी दी। यह समझौता ऐसे मुश्किल वक्त में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन जी-20 भागीदारों में विकासशील देशों के लिए वाशिंगटन को एक वैकल्पिक साझेदार और निवेशक के रूप में पेश करके वैश्विक बुनियादी ढांचे पर चीन के बेल्ट एंड रोड जोर को टक्कर देना चाहते हैं।

अमेरिका की भी नजर
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक समझौते का उद्देश्य मध्य पूर्व के देशों को रेलवे से जोड़ना और उन्हें बंदरगाह के जरिए भारत से जोड़ना है। इससे खाड़ी देशों से यूरोप तक ऊर्जा और व्यापार के फैलाव में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं शिपिंग में लगने वाले समय के साथ, लागत और ईंधन की भी बचत होगी। जॉन फाइनर ने कहा कि इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों को लिंक करना एक बड़ा अवसर है। हालांकि इस डील से जुड़ी अन्य जानकारियां अभी सामने नहीं आ सकी हैं। फाइनर के मुताबिक अमेरिकी नजरिए से देखें तो यह समझौता पूरे क्षेत्र पर सकारात्मक असर डालेगा और अगर कहीं संघर्ष की स्थिति बनती है तो उससे निपटने में मददगार होगा। रेल और शिपिंग कॉरिडोर ऊर्जा उत्पादों सहित देशों के बीच अधिक व्यापार को बढ़ावा देगा। माना जा रहा है कि यह समझौता बेहद ऐतिहासिक होगा और यूरोपीय संघ के नेताओं की भी इसको लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया रहेगी।

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