नई दिल्ली। धरती के भीतर छिपे रहस्यों को जानने की जिज्ञासा इंसान को हमेशा से रही है। अब जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ गॉटिंगेन के वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाली खोज की है। शोध के मुताबिक, धरती के कोर में लगभग 30 अरब टन सोना मौजूद हो सकता है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2.77 ट्रिलियन यूरो बताई जा रही है।
ज्वालामुखी से मिल रहा संकेत
वैज्ञानिकों ने हवाई के किलाउआ (Kīlauea) और लोईही (Lo‘ihi) ज्वालामुखियों से निकले लावा का अध्ययन किया। इसमें धरती के कोर की रासायनिक छाप मिली। शोधकर्ताओं का कहना है कि ज्वालामुखी गतिविधियों के जरिए सोना और रूथेनियम जैसी दुर्लभ धातुएं धीरे-धीरे सतह तक पहुंच रही हैं।
अरबों टन सोना, लेकिन सिर्फ अंश पहुंचता है सतह तक
अध्ययन में दावा किया गया है कि कोर में मौजूद अरबों टन सोने का केवल बहुत ही सूक्ष्म हिस्सा सतह तक पहुंच पाता है। शोध के सह-लेखक मैथियास विलबॉल्ड ने कहा,
“हम यहां गांठों की नहीं, बल्कि बेहद सूक्ष्म निशानों की बात कर रहे हैं।”
खनन अभी असंभव
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तकनीक से धरती के कोर से सीधे खनन करना असंभव है। यह खोज फिलहाल केवल वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाने के लिए अहम है, क्योंकि यह धरती की संरचना और उसकी गहराइयों में अरबों साल से चल रही प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद करती है।
महासागरीय चट्टानों से मिला सबूत
इस शोध के लिए महासागर द्वीपों की बेसाल्ट चट्टानों का विश्लेषण किया गया। इन चट्टानों में पाया गया रूथेनियम धातु धरती के कोर का संकेतक है। खासकर लावा में 100Ru आइसोटोप का उच्च स्तर इस बात का प्रमाण है कि धरती का कोर पूरी तरह बाकी हिस्सों से अलग-थलग नहीं है, जैसा कि पहले माना जाता था।