राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए ‘शर्टलेस प्रदर्शन’ पर अब अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए चारों मुख्य आरोपियों को 5 दिन (25 फरवरी तक) की पुलिस कस्टडी (रिमांड) में भेज दिया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि ने इस मामले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि यह कोई जायज विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि ‘पब्लिक ऑर्डर’ (कानून-व्यवस्था) पर एक खुला हमला था, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की राजनयिक छवि (Diplomatic Image) को भारी नुकसान पहुंचाया है।
अदालत के आदेश की अहम बातें: ‘पवित्रता और सुरक्षा को डाला खतरे में’
पीटीआई (PTI) के हवाले से सामने आई अदालत के आदेश की कॉपी के अनुसार, कोर्ट ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। मजिस्ट्रेट ने कहा कि आरोपियों ने एक हाई-सिक्योरिटी वाले इंटरनेशनल कॉन्क्लेव में घुसपैठ की, जहां दुनियाभर के दिग्गज और वीवीआईपी डेलीगेट्स मौजूद थे।
अदालत ने कहा, “प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर ‘इंडिया-यूएस ट्रेड डील कॉम्प्रोमाइज्ड’ जैसे आपत्तिजनक नारों वाली टी-शर्ट पहन रखी थी। उन्होंने जोर-जोर से नारेबाजी की, सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डाली और पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई हैं।”
5 दिन की रिमांड क्यों? ‘बड़ी साजिश और भागने का है खतरा’
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी— नेशनल सेक्रेटरी कृष्णा हरि (बिहार), स्टेट सेक्रेटरी कुंदन यादव (बिहार), यूपी स्टेट प्रेसिडेंट अजय कुमार और तेलंगाना के नरसिम्हा यादव— दूर-दराज के इलाकों से ताल्लुक रखते हैं। अदालत ने माना कि इनके फरार होने का खतरा बहुत ज्यादा है।
कोर्ट ने 1980 के एक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआती जांच में ‘बाहरी साजिश’ (Larger Conspiracy) के लिंक मिलने से मामला और भी गंभीर हो गया है। आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स (Digital Footprints), पैसों के लेन-देन (Financial Trails) और सह-आरोपियों की संलिप्तता की गहन जांच के लिए पुलिस रिमांड बेहद जरूरी है।
इंटरनेशनल मंच पर सुरक्षा से खिलवाड़, हो सकती है 3 साल की सजा
कोर्ट ने जोर देकर कहा कि इस मामले की बहुत बारीकी और कड़ाई से जांच होनी चाहिए, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करता है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 121 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें 3 साल तक की कड़ी सजा का प्रावधान है।