नई दिल्ली: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब स्कूलों में फीस का निर्धारण स्कूल प्रबंधन अकेले नहीं कर पाएगा, बल्कि इसमें अभिभावकों की भी अहम भूमिका होगी। दिल्ली सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए सभी प्राइवेट स्कूलों को अनिवार्य रूप से ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी’ (SLFRC) का गठन करना होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और इसमें लापरवाही बरतने वाले स्कूलों को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है।
शिक्षा मंत्री ने दी खुली चेतावनी
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्कूलों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “एकेडमिक ईयर के लिए सभी निजी स्कूलों में स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) बनाना अनिवार्य कर दिया गया है.” उन्होंने नियमों की अनदेखी करने वालों को आगाह करते हुए कहा, “अगर कोई स्कूल आदेशों का पालन नहीं करता है, जैसे SLFRC का समय पर गठन न करना, फीस प्रस्ताव समय पर जमा न करना या उस पर फैसला न करना, तो ऐसे मामलों में दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और नियंत्रण) अधिनियम व नियम, 2025 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.” उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने स्कूलों को फीस रेगुलेशन कानून के तहत कमेटी बनाने का निर्देश दिया है।
लकी ड्रॉ से चुने जाएंगे अभिभावक, यह है डेडलाइन
सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, हर निजी स्कूल को 15 दिन के भीतर यानी 10 जनवरी 2026 तक इस 11 सदस्यीय कमेटी का गठन करना होगा। इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 5 अभिभावकों और 3 शिक्षक प्रतिनिधियों का चयन ‘लकी ड्रॉ’ के जरिए किया जाएगा। ड्रॉ की तारीख और समय की जानकारी 7 दिन पहले सार्वजनिक करनी होगी और स्कूल प्रबंधन इसमें कोई दखल नहीं दे सकेगा। हालांकि, जिन अभिभावकों (EWS/DG/CWSN वर्ग) के बच्चों की फीस माफ है, उन्हें इस कमेटी में अभिभावक प्रतिनिधि के तौर पर नहीं चुना जाएगा।
25 जनवरी तक देना होगा फीस का प्रस्ताव
कमेटी बनने के बाद सदस्यों के नाम स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर लगाना अनिवार्य होगा। इसके बाद स्कूल प्रबंधन को सत्र 2025-26 के लिए फीस का पूरा ढांचा और प्रस्ताव 25 जनवरी 2026 तक SLFRC के सामने रखना होगा। प्रस्ताव मिलने के 30 दिनों के भीतर कमेटी को उस पर अपना फैसला सुनाना होगा। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए शिक्षा विभाग का एक सरकारी पर्यवेक्षक (Observer) भी कमेटी में मौजूद रहेगा।