बीपीएससी अभ्यर्थियों के समर्थन में उतरे प्रशांत किशोर, आमरण अनशन पर बैठे

बीपीएससी अभ्यर्थियों के मामले को लेकर प्रशांत किशोर गांधी मैदान में गांधी मूर्ति के नीचे आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. उन्होंने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था, अगर 2 जनवरी की शाम तक समाधान नहीं निकला तो वो खुद धरना पर बैठ जाएंगे.बीपीएससी अभ्यर्थियों के मामले को लेकर प्रशांत किशोर गांधी मैदान में गांधी मूर्ति के नीचे आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. उन्होंने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था, अगर 2 जनवरी की शाम तक समाधान नहीं निकला तो वो खुद धरना पर बैठ जाएंगे. प्रशांत किशोर ने कहा, ये अनशन बिहार की अहंकारी सरकार के खिलाफ है, जिसके नेता सीएम नीतीश कुमार ने छात्रों से मिलना भी उचित नहीं समझा. अधिकारियों ने छात्रों को पीटा. हमारे जैसे लोगों के लिए केवल एक ही रास्ता है. इसलिए मैं अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहा हूं.बता दें कि बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता (प्रारंभिक) परीक्षा 13 दिसंबर को हुई थी. परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थी इसे दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं.प्रशांत किशोर के धरने पर बैठने से एक बार फिर बीपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हो सकता है. अभ्यर्थियों को प्रशांत किशोर, तेजस्वी, पप्पू यादव जैसे नेताओं के साथ ही देश के जाने-माने टीचर खान सर का भी समर्थन मिल रहा है. बीते 2 हफ्ते से भी अधिक समय से अभ्यर्थियों का धरना जारी है. उधर, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचेंगे. यहीं बीपीएससी छात्र धरना दे रहे हैं. पप्पू यादव छात्रों के साथ धरने पर बैठेंगे.
प्रशांत किशोर की पांच मांगें
आमरण अनशन पर बैठे प्रशांत किशोर की पांच मांगें हैं. पहली मांग- उनका कहना है कि 70वीं बीपीएससी परीक्षा में हुई अनियमितता और भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच हो और परीक्षा दोबारा कराई जाए. दूसरी मांग- 2015 में किए गए वादे के तहत 18 से 35 साल के हर बेरोजगार युवा को भत्ता दिया जाए.प्रशांत किशोर की तीसरी मांग है कि पिछले 10 साल में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई अनियमितता और पेपर लीक की जांच व दोषियों पर की गई कार्रवाई पर श्वेत पत्र जारी किया जाए.
लाठीतंत्र बनाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो
चौथी मांग- लोकतंत्र की जननी बिहार को लाठीतंत्र बनाने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए. पीके की पांचवीं मांग– बिहार की सरकारी नौकरियों में बिहार के युवाओं की कम से कम दो तिहाई हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए डोमिसाइल नीति लागू की जाए.

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