राज्यसभा चुनाव: क्या फिर छिनेगी उपेंद्र कुशवाहा की कुर्सी या NDA निभाएगा वादा? RLM चीफ ने खुद साफ कर दी तस्वीर

बिहार में अगले महीने (मार्च 2026) होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिनमें से 2 सीटें जेडीयू (JDU) और 2 बीजेपी (BJP) के खाते में जाना लगभग तय है। लेकिन सबसे बड़ा सस्पेंस राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के चीफ उपेंद्र कुशवाहा की सीट को लेकर बना हुआ है। क्या बीजेपी अपने कोटे से कुशवाहा को दोबारा राज्यसभा भेजेगी या इस बार उनका पत्ता कट जाएगा? इस बड़े सवाल पर शनिवार (21 फरवरी 2026) को खुद उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है।

‘NDA का आंतरिक मामला है… काम अभी खत्म नहीं हुआ’

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने कुशवाहा से दोबारा राज्यसभा भेजे जाने को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी। कुशवाहा ने कहा, “जिन कारणों से उस समय (पिछली बार) उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा की सदस्यता दी गई थी, एनडीए ने विचार किया था… तो आज की तारीख में यह विषय एनडीए का आंतरिक मामला है, एनडीए के नेता इसका फैसला करेंगे।” वहीं, जब एक पत्रकार ने बिहार विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए पूछा कि क्या एनडीए का ‘काम खत्म हो गया’ है, तो कुशवाहा ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा, “कौन सा काम खत्म हो गया…?”

पार्टी ने याद दिलाया चुनाव से पहले का वादा

भले ही उपेंद्र कुशवाहा खुलकर कोई दावा नहीं कर रहे हों, लेकिन उनकी पार्टी ने अंदरखाने दबाव बनाना शुरू कर दिया है। एबीपी न्यूज़ से बातचीत में RLM के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के साथ इस मुद्दे पर स्पष्ट बातचीत हुई थी, इसलिए कुशवाहा को हर हाल में फिर से राज्यसभा भेजा जाना चाहिए। बता दें कि बिहार की जो 5 सीटें खाली हो रही हैं, उनमें से एक सीट फिलहाल उपेंद्र कुशवाहा के पास ही है, जो उन्हें पिछले कार्यकाल में बीजेपी कोटे से दी गई थी।

चिराग पासवान की मां रेस से बाहर

उपेंद्र कुशवाहा के अलावा, लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान की मां रीना पासवान के भी एनडीए कोटे से राज्यसभा जाने की अटकलें जोरों पर थीं। हालांकि, शुक्रवार को खुद चिराग पासवान ने इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं पर पूरी तरह से विराम लगा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मां सियासत से दूर रहना चाहती हैं और राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है। अब देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए बचे हुए उम्मीदवारों को लेकर क्या फैसला लेता है।

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