बिहार चुनाव 2025: C-Voter सर्वे में किसके लिए आई खुशखबरी? तेजस्वी और प्रशांत किशोर की बढ़ी ताकत

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जारी C-Voter का ताजा ट्रैकर सियासी हलचल बढ़ाने वाला साबित हुआ है। इस सर्वे में विपक्ष के लिए राहत भरी खबर सामने आई है, जहां आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और जनसुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर की लोकप्रियता में उछाल देखने को मिला है।

तेजस्वी और प्रशांत किशोर की रेटिंग में इजाफा

C-Voter ट्रैकर के अनुसार, तेजस्वी यादव की लोकप्रियता बढ़कर 35% पर पहुंच गई है। फरवरी से लगातार नंबर वन बने तेजस्वी की रेटिंग जून, जुलाई और अगस्त में गिरी थी, लेकिन सितंबर में फिर से इसमें उछाल आया है।
इसी तरह प्रशांत किशोर की रेटिंग भी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर 23% पर पहुंच गई है। उनकी आक्रामक चुनावी कैंपेनिंग, खासकर बीजेपी पर केंद्रित रणनीति, इस बढ़त का कारण मानी जा रही है।

नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी का हाल

सर्वे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रेटिंग 16% दर्ज की गई है। वहीं, एनडीए के चेहरे सम्राट चौधरी की लोकप्रियता घटकर 6.5% पर आ गई है।
C-Voter के फाउंडर यशवंत देशमुख के मुताबिक, प्रशांत किशोर की कैंपेनिंग से एनडीए का वोट बैंक प्रभावित हो रहा है और इसका सीधा फायदा तेजस्वी यादव को मिल रहा है।

वोट शेयर और संभावनाएं

हालांकि यह ट्रैकर वोट शेयर को नहीं दिखाता, लेकिन इससे रुझान साफ होता है कि तेजस्वी और प्रशांत किशोर की ओर जनता का रुझान बढ़ रहा है। अगर ये रेटिंग वोट में तब्दील हुई, तो दोनों नेताओं को चुनावी फायदा मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत किशोर को किंगमेकर बनने के लिए कम से कम 25% वोट शेयर जुटाना होगा, जबकि अभी उनके अनुमानित वोट 8-10% के बीच माने जा रहे हैं।

महिला वोटरों का असर

नीतीश कुमार की योजनाओं का असर महिला मतदाताओं में अब भी दिखाई देता है। महिला रोजगार योजना और साइकिल योजना जैसी योजनाओं ने उनके लिए मजबूत आधार तैयार किया है, जो चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

मोदी-राहुल की लोकप्रियता में बदलाव

C-Voter ट्रैकर ने राष्ट्रीय नेताओं की रेटिंग भी उजागर की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रेटिंग 57% से घटकर 51% रह गई है। वहीं, राहुल गांधी की लोकप्रियता 35% से बढ़कर 41% तक पहुंच गई है। दोनों नेताओं के बीच का अंतर अब घटकर 10% रह गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कांग्रेस के लिए सकारात्मक और एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत है।

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