पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। चुनाव आयोग और सरकार पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए संपूर्ण विपक्ष ने मंगलवार को विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। हालात ऐसे बन गए कि विधानसभा का मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और सदस्यों को दूसरे द्वार से भीतर प्रवेश करना पड़ा।
धरने पर बैठा विपक्ष, काले कपड़ों में जताया विरोध
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्षी दलों ने पोर्टिको में डेरा डाल दिया।
सभी विपक्षी विधायक काले कपड़े पहनकर, हाथों में प्लैकार्ड लिए, सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाज़ी करते नज़र आए।
उनका आरोप था कि एसआईआर के नाम पर सरकार वोटरों की पहचान के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस विधायक राजेश राम का बड़ा आरोप
धरने के दौरान कांग्रेस विधायक राजेश राम ने मीडिया से कहा:
“चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर वोट बंदी करने की साजिश कर रहा है। गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों से उनके वोट का अधिकार छीना जा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया पर पुनर्विचार करना चाहिए और अगर ज़रूरत हो तो चुनाव के बाद इसे जारी रखा जाए।
राजेश राम ने आशंका जताई कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया से लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं, जिसका सीधा लाभ भाजपा और उसके सहयोगी दलों को मिलेगा।
45 मिनट तक ठप रहा विधानसभा का प्रवेश
विपक्ष का यह विरोध प्रदर्शन करीब 45 मिनट तक चला, जिसके कारण विधानसभा का मुख्य द्वार पूरी तरह जाम हो गया।
स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन को दूसरे गेट को खोलना पड़ा, जिससे मंत्रीगण और अन्य सदस्य सदन के भीतर जा सके।
सियासी पारा चढ़ा, विवाद थमने के आसार नहीं
बिहार विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर विरोध की लहर अभी थमती नहीं दिख रही।
विपक्ष का कहना है कि जब तक चुनाव आयोग एसआईआर पर पुनर्विचार नहीं करता, वे विरोध जारी रखेंगे।