
योगगुरु बाबा रामदेव रविवार की दोपहर काशी पहुंचे थे। उन्होंने ‘इंडिया’ व ‘भारत’ पर चल विवाद पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि कुछ चंद लोग ‘इंडिया’ कहने में गौरवान्वित महसूस करते हैं।
अपने देश का नाम ‘इंडिया’ तो था ही नहीं, बल्कि गुलामी के दिनों में ब्रिटिशों का यह नाम दिया हुआ है। आखिर ‘भारत’ कहने में क्या परहेज है।
जंगमबाड़ी मठ पहुंचे बाबा रामदेव ने ‘हिंदुस्तान’ से बातचीत में उन्होंने ने ज्ञानवापी मुद्दे पर कहा कि वहां एएसआई सर्वे हो रहा है। जहां तक पिलर की बात है तो वह तो सिर्फ मंदिरों में ही होता है। किसी मस्जिद में पिलर नहीं होते हैं। ज्ञानवापी की जो नींव है। वह पूरी तरह से मंदिर की आकृति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञानवापी हिंदुओं का ही धर्मस्थल है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। लिहाजा न्यायालय के आदेश का हर किसी को सम्मान करना चाहिए।
बाबा रामदेव ने कहा कि योग में सनातन धर्म व राष्ट्र धर्म अंतर्निहित है। यह समय सनातन धर्म का गौरव काल है। इसमें सनातन धर्म से ही पूरा भारत विश्व में उदीयमान हो रहा है। हिंदू शब्द से अन्य महजब के लोगों को आपत्ति है लेकिन वे हिंदुस्तान जिंदाबाद कहते हैं।
काशी की ज्योति विश्व में फैल रही
काशी को अपना संदेश देते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ की अनुकंपा से पूरा देश प्रकाशित हो रहा है। काशी की ज्योति पूरे विश्व में फैल रही है। वैश्विक नेतृत्व की क्षमता वाले यशस्वी प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी हैं और यूपी में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी हैं। दोनों के नेतृत्व में यूपी और सनातन धर्म मजबूत हो रहा है।
बाबा विश्वनाथ, कालभैरव व व अन्नपूर्णा का लिया आशीर्वाद
बाबा रामदेव रविवार की सुबह बनारस पहुंचे थे। उन्होंने पहले कालभैरव फिर बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद मां अन्नपूर्णा के दरबार में पहुंचे। यहां महंत शंकरपुरी ने उनका अभिवादन किया। इसके बाद वह जंगमबाड़ी मठ पहुंचे। यहां जगद्गुरु डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य से आशीर्वाद लिया। मठ में ही वेबिनार के जरिए पतंजलि योग की कर्नाटक यूनिट की धर्मसभा को संबोधित किया। इस दौरान सतुआ बाबा, प्रो. ब्रजभूषण ओझा, एडवोकेट उदयनाथ सिंह, मठ के प्रबंधक आरके स्वामी, विश्वनाथ धाम के सीईओ सुनील कुमार वर्मा रहे।
कांची मठ में शंकराचार्य से भी मिले
बाबा रामदेव हनुमान घाट स्थित कांची मठ भी गये। यहां शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेन्द्र सरस्वती से आशीर्वाद लिया। वह संकटमोचन मंदिर के पास स्थित प्रो. ब्रजभूषण ओझा के आवास भी गए और उनके बच्चों को आशीष दिया।