BJP ने यूं ही नहीं चला भजन लाल शर्मा पर दांव, इन खूबियों के कारण मिला राजस्थान का ताज

राजस्थान में बीजेपी ने भजन लाल शर्मा पर यूं ही दांव नहीं खेला है। भजन लाल शर्मा की संगठन को मजबूत करने की खूबियों की वजह से राजस्थान का ताज मिला है। दरअसल, भजन लाल शर्मा जब भाजयुमो के जिला अध्यक्ष थे उस दौरान उन्होंने दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आय़ोजित भाजयुमो के राष्ट्रीय अधिवेशन में एक बूथ 10 यूथ का प्रस्ताव रखा था।इस प्रस्ताव की जमकर तारीफ हुई थी। बीजेपी के बड़े नेताओं के नजरों में भजन लाल शर्मा आ गए थे। यहीं से वह राजनीति की सीढ़िया आगे बढ़ते गए है। भजन लाल शर्मा ने छोटे स्तर से राजनीति की शुरुआत की है। भरतपुर जिले के नदबई तहसील के अटारी गांव में जन्में भजन लाल शर्मा ने संगठन को मजबूत करने के लिए नए नवाचार किए। परिणाम यह हुआ कि उन्हें संगठन में बड़े पद मिलते गए है। सतीश पूनिया और सीपी जोशी की टीम में शामिल रहे। सीपी जोशी ने पूनिया की टीम को भंग कर दिया था। लेकिन भजन लाल शर्मा को बरकरार रखा।

किसान परिवार से आते हैं भजन लाल शर्मा

राजस्थान के नए सीएम का जन्म भरतपुर जिले की नदबई तहसील के अटारी गांव में हुआ है। वे एक किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने काफी गरीबी में अपना बचपन बिताया है। भजन लाल शर्मा ब्राह्मण परिवार से आते है। जो कि राजस्थान की तीसरी बड़ी आबादी मानी जाती है। हर विधानसभा में 10 से 5 हजार ब्राह्मण रहते है। जीत का यह भी बड़ा फैक्टर माना जाता है। राजस्थान में सत्ता का संघर्ष जाट और राजपूतों के बीच रहा है। लेकिन ब्राह्मण समुदाय भी बड़ी भूमिका निभाता रहा है।

दिग्गज नेताओं को पीछे छोड़ा

भजन लाल शर्मा भरतपुर जिले की नदबई में एबीवीपी के सक्रिय कार्यकर्ता थे। 1992 में श्रीराम भूमि जन्म आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। जेल गए। भजन लाल शर्मा विभिन्न पदों पर रहे है। सियासी जानकारों का कहना है कि भरतपुर जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे भजन लाल शर्मा सीएम की रेस में शामिल नहीं थे। लेकिन अचानक उनका नाम सामने आ गया है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि महंत बालकनाथ, दीया कुमारी, किरोड़ी लाल मीणा, कैलाश चौधरी और वसुंधरा राजे रेस में शामिल है। लेकिन अचानक भजन लाल शर्मा ने दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया।

कुशल संगठन कर्ता माने जाते हैं

भजनलाल शर्मा के बारे में कहा जाता है कि वह संगठन को मजबूत करने के लिए जाने जाते है। एक बूथ टेन यूथ का प्रस्ताव रखकर भजन लाल शर्मा ने अपनी रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। दिल्ली में पार्टी नेताओं से संपर्क भी उनकी पहचान के बड़े कारण माने जाते है। हालांकि, भजन लाल शर्मा ने पहला चुनाल लड़ा 2003 में लड़ा था। लेकिन हार गए। इसके बाजजूद भी पार्टी में बड़े पद मिलते गए।

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