Azam Khan News: आजम खान को बड़ा झटका! आयकर विभाग ने रद्द की जौहर ट्रस्ट की 12AB टैक्स छूट, बढ़ीं मुश्किलें

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। आयकर विभाग ने वित्तीय अनियमितताओं और ट्रस्ट संचालन में कथित गड़बड़ियों के आरोपों के आधार पर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का 12AB (चैरिटेबल) पंजीकरण रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद ट्रस्ट को मिलने वाली टैक्स छूट समाप्त हो गई है, जिससे जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

12AB पंजीकरण रद्द होने से बढ़ा संकट

मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का संचालन जौहर ट्रस्ट के माध्यम से होता है। आजम खान इस ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी और विश्वविद्यालय के आजीवन चांसलर रहे हैं। आयकर विभाग के आदेश में ट्रस्ट की गतिविधियों को अनियमित और जनहित के विपरीत बताया गया है।

पंजीकरण रद्द होने के बाद ट्रस्ट को अब टैक्स छूट का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा भारी टैक्स, ब्याज और संभावित जुर्माने का भी सामना करना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई का असर ट्रस्ट की भविष्य की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।

जांच में सामने आईं वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

आयकर विभाग की जांच में ट्रस्ट की गतिविधियों को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, ट्रस्ट पर जनहित के कार्यों के बजाय अन्य गतिविधियों में शामिल होने, जबरन चंदा वसूली और कथित तौर पर ‘डमी’ ट्रस्टियों की नियुक्ति जैसे आरोप लगाए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पहले की गई जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और जब्त साक्ष्यों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया था। इसी जांच में आजम खान और उनके करीबी सहयोगियों से जुड़े लगभग 450 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने की बात कही गई है।

जमीन अधिग्रहण और ट्रस्ट संचालन पर भी सवाल

सूत्रों के अनुसार, अदालत से सजा मिलने के बाद आजम खान ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्रस्ट जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूल के नाम पर जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवादों में शामिल रहा।

ट्रस्ट के पास भवन, गेस्ट हाउस, आवासीय ब्लॉक, मस्जिद, फर्नीचर, उपकरण और अन्य कई संपत्तियां मौजूद हैं। ऐसे में आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद ट्रस्ट से जुड़े अन्य लोगों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया कि जब-जब आजम खान उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे, तब-तब जौहर ट्रस्ट को बड़े पैमाने पर आर्थिक सहयोग मिला।

उन्होंने दावा किया कि जौहर ट्रस्ट की बैलेंस शीट और अन्य दस्तावेज प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपे गए थे, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ी। उनके अनुसार, इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आयकर विभाग ने ट्रस्ट को 37 पन्नों का नोटिस जारी किया था।

आकाश सक्सेना ने यह भी आरोप लगाया कि आजम खान के मंत्री रहते हुए जबरन वसूली और भ्रष्टाचार के जरिए धन जुटाया गया, जिसकी जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं।

2023 में भी हुई थी आयकर विभाग की छापेमारी

वित्तीय और भूमि से जुड़े मामलों की जांच के दौरान वर्ष 2023 में आयकर विभाग ने आजम खान, उनके परिवार और ट्रस्ट से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के बाद लखनऊ स्थित आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट का 12AB पंजीकरण और चैरिटेबल टैक्स छूट दोनों रद्द कर दिए।

जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि ट्रस्ट जनहित के उद्देश्य पूरे नहीं कर रहा था और इसके संचालन में कई अनियमितताएं सामने आईं।

जौहर शोध संस्थान और विश्वविद्यालय को लेकर भी उठे सवाल

जांच में यह भी सामने आया कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर शोध संस्थान को मात्र 100 रुपये की लीज पर 33 वर्षों के लिए जौहर ट्रस्ट को दिया गया था। इतना ही नहीं, इस लीज को 33-33 वर्ष के लिए दो बार बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया था।

इसके अलावा आरोप है कि समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल (2012-2017) में विश्वविद्यालय परिसर के भीतर कई भवनों के निर्माण में सरकारी धन का उपयोग किया गया। बताया गया कि उत्तर प्रदेश जल निगम की निर्माण एजेंसी के माध्यम से लगभग 17.76 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

स्थानीय एजेंसियों द्वारा कराए गए मूल्यांकन में विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण की अनुमानित लागत 308 करोड़ रुपये आंकी गई, जिसके बाद परियोजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठे।

आयकर विभाग द्वारा जौहर ट्रस्ट का 12AB पंजीकरण रद्द किए जाने के बाद आजम खान, उनके परिवार और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की कानूनी व वित्तीय चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। साथ ही जौहर यूनिवर्सिटी के भविष्य को लेकर भी नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

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