एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर कड़ा हमला करते हुए कहा कि शासन की कुछ नीतियाँ अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों और संवैधानिक नियमों के खिलाफ चली जा रही हैं। ओवैसी ने बुलडोजर कार्रवाइयों, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अतिक्रमण और नागरिकों के धार्मिक अधिकारों से छेड़छाड़ को लेकर केंद्र और कुछ राज्यों को घेरते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
बुलडोजर कार्रवाई को बताया अन्याय
ओवैसी ने मशहूर शायर साहिर लुधियानवी की पंक्तियाँ पढ़ते हुए बुलडोजर कार्रवाइयों को अन्याय का प्रतीक बताया —
‘जुल्म फिर जुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है, खून फिर खून है, टपकेगा तो जम जाएगा.’
इस शायरी के ज़रिये उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में बिना नोटिस और सही प्रक्रिया के बुलडोजर से घरों को निशाना बनाया जा रहा है, वे कार्य संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की मांग
ओवैसी ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने विध्वंस से पहले नोटिस और उचित प्रक्रिया अनिवार्य कर दी है, पर कुछ राज्य सरकारें इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहीं और गरीब तथा अल्पसंख्यक समुदायों के घरों को दण्डित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि बुलडोजर की राजनीति लोकतंत्र को कमजोर करती है और यह अन्याय खत्म नहीं होगा।
कई राज्यों के नाम लेते हुए चेतावनी
ओवैसी ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां ऐसी कार्रवाइयां दिखाई दे रही हैं। वे बोले कि जनता की आवाज़ दबाई नहीं जा सकती और यदि सरकारें नहीं संभलीं तो इसका अंत बुरा होगा।
पार्टी की लड़ाई जारी रखने का ऐलान
तेलंगाना में भी ओवैसी ने प्रशासन को चेतावनी दी कि वे कानून के दायरे में रहें। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हर स्तर पर बुलडोजर की मनमानी के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी और नागरिकों के हक की रक्षा करेगी।
मोदी-आरएसएस पर तीखी टिप्पणियाँ — ओवैसी के शब्दों में
ओवैसी ने पीएम और आरएसएस को लेकर सीधे शब्दों में कहा —
‘मालूम ये हुआ की आरएसएस का एक भी आदमी मुल्क के आज़ादी में जान नहीं गवाया’
उन्होंने प्रधानमंत्री की आरएसएस की सराहना पर भी सवाल उठाए और कहा—
‘वो बिलकुल गलत हैं’
साथ ही ओवैसी ने आगे कहा—
‘प्रधानमंत्री जी इतनी तारीफ़ करते हैं न RSS का, प्रधानमंत्री जी बता दें वो जो दुआ पढ़ते हैं उसका क्या मतलब है. प्रधानमंत्री जी खुद कहते हैं की RSS के हैं वो, हाँ आप होंगे RSS के लिए’.
धार्मिक अधिकारों पर गंभीर आरोप
ओवैसी ने सीधे तौर पर कानूनों के जरिए मुसलमानों के धार्मिक स्थानों और अधिकारों को लक्षित करने का आरोप लगाया और कहा—
‘मैं आपको बताना चाहता हूँ आपने ऐसा कानून बना दिया जिससे आप हमारी मस्जिदे छीन लेंगे, हमारे शमशान छीन लेंगे, दरगाह छीन लिया. आज हमारी मस्जिदों में जाने से रोक रहे है. हद्द तो तब हो गई I LOVE MODI बोल सकते हो लेकिन I LOVE MOHAMMAD नहीं बोल सकते है. अगर हम मुस्लमान है तो मुहम्मद की वजह से है उसके आगे उसके पीछे कुछ नहीं है. क्या करना चाहते ho आप. प्रधानमंत्री का फोटो लगाएंगे तो चलेगा’.
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और सामाजिक तेज़ी
ओवैसी के ये बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं और उन्होंने भारतीय राजनीति में बढ़ती हुई सांप्रदायिक तनावों और सरकारी नीतियों पर एक नई बहस छेड़ दी है। उनके आह्वान ने न्याय प्रक्रियाओं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन और नागरिक अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा पर नए सार्वजनिक विमर्श को जन्म दिया है।