‘शक्सगाम घाटी हमारा हिस्सा, 1963 का समझौता अवैध’, चीन-पाकिस्तान को सेना प्रमुख की दो टूक चेतावनी

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सीमा विवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चीन और पाकिस्तान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न अंग है और इसे लेकर पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ 1963 का समझौता भारत के लिए पूरी तरह से अमान्य है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा और शक्सगाम घाटी में किसी भी विदेशी गतिविधि को मान्यता नहीं देता।

‘हम वहां किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करते’

सेना प्रमुख ने ऐतिहासिक तथ्यों को रखते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अवैध रूप से शक्सगाम घाटी का हिस्सा चीन को सौंप दिया था, जिसे भारत ने कभी स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘हम वहां किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करते हैं. यह समझौता हमारे लिए गैर-कानूनी है.’ इसके साथ ही उन्होंने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को भी अवैध बताया। उन्होंने कहा कि चूँकि यह परियोजना भारतीय भू-भाग से होकर गुजरती है, इसलिए यह दोनों देशों द्वारा किया गया एक गैर-कानूनी कार्य है।

ऑपरेशन सिंदूर जारी, 139 बार हुआ सीजफायर उल्लंघन

सीमा पर जारी तनाव और सेना की कार्रवाई की जानकारी देते हुए जनरल द्विवेदी ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2025 में अब तक 139 बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया, जिसमें से 124 घटनाएं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुईं। सेना ने इस ऑपरेशन के तहत निर्धारित 9 में से 7 लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि जम्मू क्षेत्र में पीर पंजाल के दक्षिण में अभी भी करीब 40 आतंकी सक्रिय हैं, जिनमें से अधिकांश पाकिस्तानी हैं, लेकिन सेना की तैनाती वहां पूरी मजबूती के साथ कायम है।

इंफैंट्री और पैरा-एसएफ में महिलाओं की एंट्री पर बड़ा बयान

सेना में महिलाओं की भूमिका को लेकर भी जनरल द्विवेदी ने महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में महिलाएं इन्फैंट्री और पैरा-एसएफ (स्पेशल फोर्सेज) जैसी कॉम्बैट भूमिकाओं में भी नजर आ सकती हैं, लेकिन इसके लिए शारीरिक मानदंडों से समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सेना ‘जेंडर इक्वालिटी’ (लैंगिक समानता) के बजाय ‘जेंडर न्यूट्रैलिटी’ (लैंगिक तटस्थता) पर विश्वास करती है। यदि महिलाएं सेना द्वारा निर्धारित कड़े मानकों और मेडिकल फिटनेस को पूरा करती हैं, तो उनके लिए रास्ते खुले हैं।

ड्रोन युद्ध और 13 ‘भैरव’ बटालियन तैयार

आधुनिक युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए सेना अपनी ताकत बढ़ा रही है। जनरल द्विवेदी ने बताया कि अब तक 13 ‘भैरव लाइट कमांडो बटालियन’ तैयार की जा चुकी हैं, जो इन्फैंट्री और पैरा-एसएफ के बीच की कड़ी का काम करेंगी। ड्रोन खतरों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 500 किलोमीटर के बॉर्डर पर हजारों ड्रोन हो सकते हैं। इसके जवाब में इन्फैंट्री बटालियनों में खास ‘अशनि प्लाटून’ बनाए गए हैं और तोपखाने में ‘दिव्यास्त्र बैटरी’ तैयार की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारतीय सेना ने 100 किलोमीटर तक मार करने वाले ड्रोन का सफल परीक्षण कर लिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *