इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1976 के नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले में किसानों के पक्ष में बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए मुआवजे की राशि में भारी बढ़ोतरी का आदेश दिया है। कोर्ट ने जमीन का मुआवजा 6 रुपये प्रति वर्ग गज से बढ़ाकर 28.12 रुपये प्रति वर्ग गज करने का निर्देश दिया है। चार दशक से ज्यादा समय से लंबित इस मामले के फैसले के बाद प्रभावित किसानों में खुशी का माहौल है।
1976 में हुआ था जमीन अधिग्रहण
यह मामला नोएडा क्षेत्र के मोरना, परगना और तहसील दादरी की जमीनों से जुड़ा हुआ है, जो उस समय गाजियाबाद जिले का हिस्सा थीं और अब नोएडा क्षेत्र में शामिल हैं। जमीन का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत 1 जून 1976 को जारी अधिसूचना के माध्यम से किया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में जस्टिस संदीप जैन ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। यह निर्णय 2022 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अजय पाल सिंह व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य मामले में दिए गए आदेश के संदर्भ में आया है।
कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कलेक्टर और रेफरेंस कोर्ट का अवार्ड 30 अप्रैल 1982 से पहले पारित किया गया था। इसलिए संशोधित अधिग्रहण कानून के तहत अपीलकर्ताओं को 30 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा नहीं मिलेगा। हालांकि किसानों को 15 प्रतिशत की दर से बढ़ा हुआ मुआवजा पाने का अधिकार माना गया।
कोर्ट ने पहले तय 6 रुपये प्रति वर्ग गज की दर को बढ़ाकर 28.12 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया। यह फैसला किसान राम करण व अन्य के पक्ष में सुनाया गया।
किसानों में खुशी, बढ़ी उम्मीदें
करीब 44 साल बाद आए इस फैसले से प्रभावित किसानों में खुशी की लहर देखी जा रही है। जिन जमीनों का अधिग्रहण किया गया था, वे अब नोएडा के विकास कार्यों में उपयोग हो रही हैं। किसानों को उम्मीद है कि कोर्ट के आदेश के बाद अब मुआवजा वितरण की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
इस फैसले को लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।