जजों से वकीलों का अभद्र व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेताया

लाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि न्यायाधीशों के प्रति वकीलों के अशिष्ट व्यवहार की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि वकीलों से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायाधीशों के खिलाफ असंयमित भाषा का प्रयोग करने से बचें।

इसी के साथ कोर्ट ने दोबारा गलती न करने और बिना शर्त माफी मांगने पर कानपुर नगर के एक अधिवक्ता के खिलाफ अवमानना कार्रवाई समाप्त कर दी, लेकिन जिला जज कानपुर नगर को दो वर्ष बाद याची के आचरण को लेकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र एवं न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि अधिवक्ताओं द्वारा पीठासीन न्यायाधीश के प्रति अभद्र व्यवहार की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। न्यायाधीश केवल सौहार्दपूर्ण वातावरण में ही काम कर सकते हैं। न्यायालय के अधिकारी होने के नाते अधिवक्ता से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह न्यायाधीश के प्रति अभद्र व्यवहार करें या पीठासीन अधिकारी के विरुद्ध असंयमित भाषा का प्रयोग करें।

कोर्ट ने यह टिप्पणी सिविल जज कानपुर नगर द्वारा अधिवक्ता योगेन्द्र त्रिवेदी के खिलाफ भेजे गए संदर्भ पर सुनवाई करते हुए की। एडवोकेट त्रिवेदी ने पिछले साल एक अदालती कार्यवाही के दौरान कथित तौर पर कोर्ट स्टाफ से फाइल छीन ली थी और ट्रायल जज के खिलाफ टिप्पणी की थी। त्रिवेदी पर जज के खिलाफ अनचाही टिप्पणी करने का भी आरोप है।

बाद में उन्होंने बिना शर्त माफी मांगी, जब हाईकोर्ट ने सिविल जज के संदर्भ के आधार पर शुरू की गई अदालती अवमानना की कार्यवाही में उन्हें नोटिस जारी किया। हालांकि न तो हाईकोर्ट और न ही सिविल जज माफी से संतुष्ट थे। इसके बाद मामले को स्थगित कर दिया गया ताकि वकील बेहतर हलफनामा दाखिल कर सकें।

इसके बाद त्रिवेदी ने दोबारा बिना शर्त माफी मांगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में हाजिर हुए अधिवक्ता ने कहा कि वह कभी भी इस तरह की अवज्ञाकारी हरकत नहीं दोहराएंगे। हाईकोर्ट ने अनुरोध स्वीकार कर लिया लेकिन साथ ही वकील को भविष्य के लिए चेतावनी भी दी। कहा कि हम इस मामले में अधिक गंभीर दृष्टिकोण अपनाने के इच्छुक थे लेकिन इस तथ्य पर विचार करते हुए कि अवमाननाकर्ता युवा अधिवक्ता है और उस पर इस तरह के आचरण का कोई पूर्व आरोप नहीं है।

हम उसे सख्त चेतावनी देते हुए वर्तमान कार्रवाई समाप्त करते हैं। साथ ही यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि अवमाननाकर्ता की ओर से ऐसा कोई अवांछनीय कृत्य हमारे संज्ञान में लाया जाता है तो यह न्यायालय तत्काल अवमानना की कार्यवाही फिर शुरू करेगा और मामले में गंभीरता से विचार करेगा।

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