
लोकसभा चुनाव में यूपी से बड़ी संख्या में ऐसे प्रत्याशी भी मैदान में उतरे जिन्होंने दूसरे दलों से टिकट हासिल कर लिया। पिछले चुनाव में किसी अन्य दल से थे तो इस बार किसी दूसरे दल से मैदान में उतर गए।कुछ प्रत्याशी तो ठीक चुनाव से पहले पाला बदल लिया। यूपी में ऐसे 11 प्रत्याशी हैं जिन्होंने पाला बदलकर चुनावी मैदान में दांव लगाया था। इनमें छह को ही सफलता मिली और पांच दल बदलने के बाद भी हार गए हैं। जीते प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा इंडिया गठबंधन के नेता हैं। दलबदलकर मैदान में उतरकर जीतने वाले छह में से पांच इंडिया गठबंधन यानी सपा-कांग्रेस के नेता हैं। यह भी खास है कि दल बदलने के बाद भी सांसद बने सभी छह नेता पूर्वांचल की सीटों पर जीते हैं। दल बदलने के बाद भी हारने वाले पांच में से तीन इंडिया गठबंधन के नेता हैं और दो एनडीए के हैं।
दल बदलकर जीतने वाले नेताओं की बात करें तो सबसे ऊपर नाम मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी का आता है। अफजाल अंसारी ने गाजीपुर लोकसभा सीट से पिछली बार बसपा के टिकट पर सांसदी जीती थी। इस बार अफजाल सपा के टिकट पर उतरे और भाजपा के पारसनाथ राय को हराकर लगातार दूसरी बार सांसद बने हैं। इलाहाबाद से जीते कांग्रेस नेता उज्जवल रमण सिंह कुछ दिन पहले तक सपा में थे और चुनाव से पहले ही हाथ का साथ थामा था।इसी तरह सोनभद्र की राबर्ट्सगंज सीट से जीते सपा प्रत्याशी छोटेलाल खरवार भाजपा से 2014 में सांसद थे। 2019 में राबर्ट्सगंज सीट अपना दल के कोटे में चली गई तो वहां से टिकट की दावेदारी की लेकिन पकौड़ी लाल कोल को टिकट मिल गया औऱ वह जीत भी गए। इस बार पकौड़ी लाल का टिकट कटना तय हुआ तो खरवार ने फिर से दावेदारी की। लेकिन अनुप्रिया पटेल ने पकौड़ी लाल कोल की बहू रिंकी कोल को उतार दिया। इसके बाद खरवार ने सपा से टिकट मांगा और प्रत्याशी बन कर सांसद भी बन गए।
इसी तरह जौनपुर में बसपा और फिर अपनी पार्टी बनाने वाले बाबू लाल कुशवाहा सपा के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत गए। बस्ती में बसपा से सपा में आए राम प्रसाद चौधरी भी चुनाव जीत गए हैं। राम प्रसाद ने भाजपा के हरीश द्विवेदी को हराया। दल बदलने के बाद भी जीते एनडीए के एकमात्र नेता विनोद बिंद हैं। हालांकि विनोद बिंद ने पार्टी बदली है लेकिन दोनों पार्टियां एनडीए का ही हिस्सा हैं। विनोद बिंद मिर्जापुर की मझवा सीट से निषाद पार्टी के विधायक हैं। इस बार भाजपा से भदोही की सीट से उतरे और टीएमसी के ललितेश पति त्रिपाठी को हराया।दल बदलने के बाद हारे नेताओं की बात करें तो सबसे ऊपर दानिश अली का नाम आता है। दानिश अली अमरोहा से बसपा के सांसद थे। इस बार कांग्रेस के टिकट पर अमरोहा से ही उतरे थे। सपा-कांग्रेस की लहर में भी उन्हें सफलता नहीं मिल सकी है। दानिश को भाजपा के कुंवर सिंह तंवर ने हराया। इसी तरह भदोही से भाजपा सांसद रमेश बिंद सपा से मिर्जापुर सीट से उतरे लेकिन हार गए। रमेश बिंद को अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने हराया। भदोही सीट से इंडिया गठबंधन के तरफ से टीएमसी के टिकट पर उतरे ललितेशपति त्रिपाठी भी हार गए हैं। कुछ समय पहले तक ललितेश कांग्रेस में थे। वह कांग्रेस से मिर्जापुर से विधायक भी बने थे।इसी तरह जौनपुर से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे कृपाशंकर सिंह भी हार गए हैं। कृपाशंकर सिंह लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं। वह महाराष्ट्र में कांग्रेस के विधायक रहते हुए गृहराज्यमंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। दलबदल करने के बाद भी हारने वालों में अंतिम नाम संगम लाल गुप्ता का है। संगम लाल गुप्ता प्रतापगढ़ से मैदान में उतरने के लिए अपना दल से भाजपा में आए थे लेकिन हार गए हैं।