नेहरूवादी नहीं आडवाणीवादी बनिए; राघव चड्ढा ने सरकार को दी सलाह

दिल्ली नौकरशाहों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित विधेयक सोमवार को राज्यसभा में पेश किया गया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2023 पर लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी पक्ष और विपक्ष में धारदार बहस हुई।संवैधानिक प्रावधानों से लेकर राजनीतिक घटनाक्रमों तक का हवाला देकर एक दूसरे को गलत साबित करने की कोशिश की गई। आम आदमी पार्टी की तरफ से सांसद राघव चड्ढा ने मोर्चा संभाला और सभी सांसदों से पार्टी लाइन से ऊपर उठकर इस बिल को रोकने की अपील की। उन्होंने भाजपा की ओर से पूर्व में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए किए गए संघर्ष का भी विस्तार से जिक्र किया। साथी ही ‘सुपारी जैसी छोटी पार्टी’ कहे जाने पर गृहमंत्री अमित शाह को जवाब दिया।चड्ढा ने अपने भाषण की शुरुआत महाभारत के प्रसंग से करते हुए कहा कि यह बिल राजनीतिक धोखा है। उन्होंने कहा, ‘यह 1977 से 2015 की कहानी है। 40 साल का लंबा संघर्ष भाजपा ने दिल्ली के पूर्ण राज्य के लिए किया। 1989 के लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में बीजेपी ने दिल्ली को पूर्व राज्य का दर्जा देने की बात कही थी। 1991 में जब कांग्रेस की सरकार ने दिल्ली में विधानसभा का गठन किया तो लाल कृष्ण आडवाणी समेत अनेक नेताओं ने कहा कि दिल्ली के साथ पूरा न्याय नहीं हुआ, दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाया जाए। इन्होंने संघर्ष किया, लाठियां खाईं, दिल्ली को पूर्ण राज्य को दर्जा दिलाने के लिए। आडवाणी जी इस सदन में बिल लाए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए। इसके बाद 2013 के घोषणा पत्र में भाजपा ने कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे। यह बिल सिर्फ संविधान और लोकतंत्र का अपमान नहीं है। अटल बिहारी वाजयपेयी, आडवाणी, मदन लाल खुराना, सुषमा, जेटली सबका अपमान है।”आप’ सांसद ने लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री की ओर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का हवाला दिए का भी जिक्र किया और सलाह दी कि वह नेहरू की नहीं आडवाणी की बात मानें। उन्होंने कहा, ‘मैंने सुना कि लोकसभा में गृहमंत्री ने कहा कि नेहरू ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का विरोध किया था। मैं कहता हूं कि आप नेहरूवादी मत बनिए, आडवाणीवादी और वाजपेयीवादी बनिए और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दीजिए। पिछले 25 साल में छह विधानसभा चुनाव दिल्ली में हुए हैं।’ राघव ने कहा कि भाजपा को आडवाणी जी की इच्छा पूरी करते हुए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देना चाहिए। उन्होंने बिल को सुप्रीम कोर्ट का अपमान बताया और कहा कि संवैधानिक बेंच के फैसले को 8 दिन में पलकर संदेश दिया गया कि ये सर्वोच्च अदालत को भी नहीं मानते।आप सांसद ने कहा कि यह बिल सारी शक्तियां एलजी को देता है। आज तक उपराज्यपाल और राज्यपाल कैबिनेट की सलाह के प्रति बाध्य थे। यह बिल कहता है कि अफसरशाही तय करेगी कि मुख्यमंत्री का फैसला सही है या गलत है, अफसर को पसंद ना आए तो वे फैसला बदल सकते हैं। गृहमंत्री की ओर से ‘आप’ को सुपारी जितनी छोटी पार्टी कहे जाने पर पलटवार करते हुए राघव ने कहा, ‘यह वही सुपरी जितनी जितनी पार्टी है जिसे आजाद भारत की सबसे तेजी से बढ़ने वाली पार्टी कहा जाता है। यह वही सुपारी जितनी पार्टी है जिसने भाजपा को तीन बार हराया। यह वही सुपारी जितनी पार्टी है जिसने 2015 और 2020 में आजाद भारत के सबसे सबसे बड़े बहुमत की सरकार बनाई। यह वही सुपारी जितनी पार्टी है जिसने पंजाब में भाजपा को शून्य कर दिया। 10 साल में राष्ट्रीय पार्टी है। यह वह सुपारी पार्टी है जिसके 161 विधायक और 111 सांसद हैं।’

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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