मणिपुर की घटना शर्मनाक… मगर उस पर राजनीति उससे ज्यादा शर्मनाक

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि मणिपुर की घटना शर्मनाक है, लेकिन उस पर राजनीति करना उससे भी ज्यादा शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा वहां जनसांख्यिकी में बदलाव करने की कतई नहीं है।ऐसे में सभी पक्षों को मिलकर उस राज्य में शांति बहाली की अपील करनी चाहिए। लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर से जुड़े घटनाक्रम का ब्यौरा दिया। उन्होंने सरकार की ओर से वहां शांति स्थापित करने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी। गृह मंत्री ने मणिपुर में सभी पक्षों से हिंसा छोड़ने की अपील की और कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है।शाह ने कहा, ‘वे विपक्ष की इस बात से सहमत हैं कि मणिपुर में हिंसा का तांडव हुआ, हिंसक घटनाएं हुईं। वहां जो कुछ भी हुआ, वह शर्मनाक है। उस पर राजनीति करना उससे भी ज्यादा शर्मनाक है।’ उन्होंने कहा कि वहां जो दंगे हुए वे परिस्थितिजन्य थे और इस पर राजनीति करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता को पता चलना चाहिए कि मणिपुर में अतीत में भी किस तरह से नस्लीय हिंसा होती रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा वहां जनसांख्यिकी को बदलने की कतई नहीं है। इस विषय पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इन घटनाओं में किसी की जान गई है, तो किसी का सम्मान गया है।
जनता के सामने फैलाया गया भ्रम: शाह
गृह मंत्री ने कहा, ‘कोई कितना भी दूर क्यों न हो, वह है तो भारत का नागरिक ही। इधर के और उधर के सभी लोगों को वहां शांति की अपील में साथ आना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि यह भ्रांति देश की जनता के सामने फैलाई गई है कि सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं है। मैं यह साफ करना चाहता हूं कि सत्र आहूत होने से पहले मैंने पत्र लिखकर मणिपुर पर चर्चा के लिए कहा था। शाह ने कहा कि मणिपुर में 6 साल पहले भाजपा की सरकार बनी थी और तब से गत तीन मई तक वहां एक दिन भी हिंसा नहीं हुई, कर्फ्यू नहीं लगा, बंद नहीं हुआ और उग्रवादी घटनाएं भी कम हुईं। मणिपुर के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि 2021 में म्यांमार में सैन्य शासन आया। इसके बाद वहां कुकी समुदाय पर शिकंजा कसा जाने लगा। फिर वहां से भारी संख्या में कुकी आदिवासी मिजोरम और मणिपुर में आने लगे और वे जंगलों में बसने लगे।
शाह ने बताया कैसे बढ़ी असुरक्षा की भावना
अमित शाह ने कहा कि इसके बाद मणिपुर के बाकी हिस्सों में असुरक्षा की भावना ने जन्म ले लिया। इसके बाद स्थिति को समझते हुए सरकार ने सीमा को बंद करने की दिशा में काम किया। शाह ने कहा कि इस बीच ऐसी अफवाह फैल गई कि 53 बसावटों को अस्थायी जंगल गांव घोषित किया गया है जिससे पहले से व्याप्त असुरक्षा की भावना और बढ़ गई। उन्होंने कहा कि इसमें घी डालने का काम किया उच्च न्यायालय के एक फैसले ने। इसमें कहा गया कि मैतेई को आदिवासी घोषित कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि इसके बाद मणिपुर में हिंसक घटनाओं में अब तक 152 लोग मारे गए हैं। इन घटनाओं को लेकर 1106 प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं और लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
महिलाओं के वीडियो पर क्या बोले शाह
शाह ने दो महिलाओं की निर्वस्त्र परेड से संबंधित वीडियो मामले पर कहा कि यह घटना 4 मई की है और बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि कोई भी सभ्य समाज इसे स्वीकार नहीं कर सकता। लेकिन, संसद सत्र के एक दिन पहले ही ये वीडियो क्यों आया और जिस किसी के पास भी यह वीडियो था उसे यह पुलिस को, पुलिस महानिदेशक को दे देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि समय पर यह वीडियो पुलिस को दिया जाता तो तभी कार्रवाई हो जाती। शाह ने कहा कि वीडियो के सामने आने के तत्काल बाद चेहरों की पहचान करके सरकार ने इस मामले में कार्रवाई की है और 9 लोगों को गिरफ्तार किया जिन पर मुकदमा चल रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *