शुक्र है कि संसद में घुसे लोग मुसलमान नहीं थे नहीं तो ये तूफान मचा देते; बीजेपी पर बरसे ललन सिंह

नता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और मुंगेर से लोकसभा सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 13 दिसंबर को संसद हमले की बरसी पर लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से कूदे दोनों लड़के अगर मुसलमान होते तो बीजेपी आज देश-विदेश में तूफान खड़ा कर देती।ललन सिंह ने गुरुवार को कहा- “भगवान का शुक्र है कि कल जो दो लोग संसद भवन में घुसे थे वो मुसलमान नहीं थे। भूल से भी वो अगर मुसलमान होते तो आज देखते इन लोगों का। पूरे देश में, पूरे दुनिया में क्या तूफान ये लोग मचाते। उसी के नाम पर ये लोग पूरे देश में धार्मिक उन्माद फैलाते।”ललन सिंह ने कहा कि संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले दोनों लड़कों को कांग्रेस के किसी सासंद ने पास दिलाया होता तो देखते बीजेपी का क्या रवैया रहता। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी नाकामी को छिपाने के लिए विपक्ष में भय पैदा करना चाहती है। भय पैदा करने से शासन नहीं चलता है। विपक्ष की आवाज को भय के दम पर दबाया नहीं जा सकता है।एक दर्जन से ऊपर विपक्षी सांसदों के गुरुवार को सदन से निलंबन पर जेडीयू सांसद ललन सिंह ने कहा कि विपक्ष के सांसद अगर मांग कर रहे थे कि सुरक्षा में जो चूक हुई है उस पर देश के गृहमंत्री बयान दें तो इसमें क्या गुनाह है। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री लोकसभा के सदस्य हैं, सुरक्षा की जिम्मेवारी उनकी है। सिंह ने कहा कि सरकार की नाकामी को छिपाने के लिए ये सांसदों को निलंबित कर रहे हैं। उन्होंने कहा- “बहुमत है तो जो मन में करते रहिए।”

याद दिला दें कि बुधवार को लखनऊ का सागर शर्मा और मैसूर का मनोरंजन डी लोकसभा की दर्शक गैलरी से चल रहे सदन में कूद गया और पीले रंग का स्मोक बम चला दिया था। इस मामले में अब तक आधा दर्जन से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इन पर संसद घुसपैठ कांड में ताल-मेल बनाकर काम करने या साजिश में साथ देने का आरोप है। संसद के अंदर पकड़े गए सागर और मनोरंजन के अलावा संसद परिसर के बाहर नारेबाजी कर रहे अमोल शिंदे और नीलम सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था। ये लोग बेरोजगारी, नौकरी, मणिपुर जैसे मुद्दों पर नारे लगा रहे थे और भगत सिंह से प्रभावित बताए जाते हैं।

इन चार लोगों की गिरफ्तारी तो तुरंत ही हो गई थी। गुरुवार को इस कांड का मास्टरमाइंड बताया जा रहा दरभंगा के ललित झा ने भी सरेंडर कर दिया था। उसकी मदद करने के आरोप में महेश और कैलाश नाम के दो लड़कों को भी हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने संसद की सिक्योरिटी में सेंध लगाने वालों पर दर्ज केस में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराएं भी जोड़ दी हैं। यूएपीए की धारा में दर्ज होने वाले मुकदमों में गिरफ्तार आरोपियों को जमानत के लिए भी लंबा संघर्ष करना पड़ता है। पुलिस की जांच जारी है और वो इन सबके इतिहास, संपर्क सब खंगाल रही है जिससे ये पता चल सके कि इसके पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं है।

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