2024 में बीजेपी के लिए आसान नहीं चार सौ प्लस

तीन राज्यों में भारी जीत के बाद बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के लिए नारा गढ़ लिया है, अगली बार 400 पार। बीजेपी नेताओं को उम्मीद है कि विपक्षी गठबंधन इंडिया के चुनावी मुद्दों का जिस तरह तीन राज्यों में दम निकला है, उसका फायदा हिंदी भाषी अन्य राज्यों में हो सकता है। लोकसभा चुनाव में करीब पांच महीने बाकी हैं। जिन तीन राज्यों में बीजेपी ने परचम लहराया है, उसमें 65 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से अभी बीजेपी के पास 61 सीटें हैं। हिंदी भाषी प्रदेश बिहार, यूपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, दिल्ली, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 193 सीटें हैं। इन राज्यों में 177 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौती है कि इन राज्यों में अपनी सीट न सिर्फ बरकरार रखे बल्कि इसकी संख्या में इजाफा भी करे। 11 राज्यों में सीटों की बढ़ने की गुंजाइश कम ही है। पूर्ण बहुमत के लिए पार्टी को बंगाल, असम, महाराष्ट्र और गुजरात में भी 2019 का प्रदर्शन दोहराना होगा। 2019 के चुनाव में बंगाल में बीजेपी को 18, महाराष्ट्र में 23 और गुजरात की सभी 26 सीटों पर जीत मिली थी।पिछले दो लोकसभा चुनाव में बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे के सहारे मैदान में उतरी है। इस कारण लगातार दो बार पूर्ण बहुमत भी मिला। मगर मोदी लहर के बावजूद कई बड़े राज्य ऐसे हैं, जहां बीजेपी का खाता भी नहीं खुला। बीजेपी कश्मीर से बिहार तक अगर उत्तर भारत की सभी सीटें जीत जाती हैं तो उसे 245 सीटें मिलेंगी। ऐसा चमत्कार भारत की राजनीति में संभव नहीं है। 400 का आंकड़ा पार करने के लिए पार्टी को केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश में भी 10-10 सीटों की जरूरत होगी, जो आसान टास्क नहीं है। इन राज्यों की कुल 118 सीटों में से बीजेपी के पास सिर्फ चार सीटें हैं, जो तेलंगाना में मिली थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कर्नाटक में भी चुनौती मिल सकती है। पिछले आम चुनाव में बीजेपी ने 28 में 25 सीटें दक्षिण भारत के राज्य में जीती थीं। इस बार पार्टी ने जेडी एस के साथ चुनावी समझौता किया है। समझौते के कारण बीजेपी को 4 सीटें जेडी-एस को देनी होगी। यानी उसे उम्दा प्रदर्शन के लिए अपने खाते की सभी 24 सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी, जो आसान नहीं है। इसके अलावा बिहार में भी महागठबंधन में शामिल आरजेडी और जेडी यू भी दम रखती है। वहां बीजेपी के लिए खुद की सीटों का बढ़ाना भी चुनौती है। 2014 के चुनाव में बीजेपी अपने दम पर सर्वाधिक 22 सीट ही जीत सकी थी।बीजेपी के पास ओडिशा से केवल आठ लोकसभा सांसद हैं, जबकि बीजेडी के पास 20 सीटें हैं। इस पूर्वी राज्य में भी बीजेपी के लिए विस्तार की अपार संभावनाएं हैं, मगर नवीन पटनायक की छवि के सामने ज्यादा उम्मीद करना आसान नहीं है। सपने पूरे करने के लिए बंगाल में भी बीजेपी को अपने पुराने रेकॉर्ड 19 सीटों से आगे बढ़ने की जरूरत होगी।2024 से पहले भाजपा को कई चुनौतियों से गुजरना है। पंजाब में उसका आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के साथ शिरोमणि अकाली दल से भी मुकाबला होगा। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पहली बार चुनाव होंगे। हिमाचल में कांग्रेस की सरकार आ चुकी है। कर्नाटक बीजेपी के हाथ से जा चुका है। बिहार में नीतीश कुमार के साथ गठबंधन टूट चुका है। नए सहयोगी की ताकत पूरे राज्य में नहीं है। महाराष्ट्र में सहयोगी बदल चुके हैं।

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