
पहले कनाडा को भारतीय छात्रों की पहली पसंद माना जाता था, लेकिन अब मन उखड़ता नजर आ रहा है। इस बात के संकेत आवेदन से जुड़े ताजा आंकड़ों से मिलते हैं, जहां ग्राफ 40 फीसदी तक गिर गया है।खास बात है कि कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार भारतीय छात्रों के आवेदन में इतनी बड़ी कमी दर्ज की गई है। साथ ही यह भी कहा जाने लगा है कि भारत-कनाडा में जारी तनाव के बीच स्थिति सुधरने की संभावनाएं कम ही हैं।
देखें आंकड़े
साल 2022 में आवेदनों की संख्या 1 लाख 45 हजार 881 थी, जो अब घटकर 86 हजार 562 पर आ गई है। गिरते आंकड़ों की जानकारी पहले बेटर ड्वेलिंग ने दी थी और अपनी रिपोर्ट में कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के शोषण के मुद्दे का जिक्र किया था। उसमें कहा गया था, ‘अंतरराष्ट्रीय छात्र कनाडा में जिन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, उन्हें अब सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा पोस्ट कर रहे हैं…।’ इन पोस्ट्स में खासतौर से रहने में होने वाला ज्यादा खर्च और कम मौकों की बात कही जा रही थी।
और भी हैं आंकड़े
हिंदुस्तान टाइम्स को IRCC यानी इमीग्रेशन, रिफ्यूजीस एंड सिटिजनशिप कनाडा के आंकड़ों की जानकारी हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी जुटाई। साल 2022 में IRCC को भारतीय छात्रों के 3 लाख 63 हजार 541 आवेदन मिले थे, जो 2021 के 2 लाख 36 हजार 77 के आंकड़े से ज्यादा थे। अक्टूबर 2023 तक 2 लाख 61 हजार 310 भारतीय छात्रों ने आवेदन किया है। खास बात है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों में करीब आधे भारतीय होते हैं, ऐसे में कुल आवेदनों की संख्या पर भी खासा असर पड़ा है।
क्या खालिस्तान का मुद्दा है वजह?
खास बात है कि आवेदन में हो रही गिरावट के कारणों में भारत और कनाडा के तनावपूर्ण रिश्ते शामिल नहीं हैं। दरअसल, खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाए थे कि इसमें भारतीय एजेंट्स शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई सबूत पेश नहीं किया गया था। तब से ही दोनों देशों के बीच रिश्ते तल्ख बने हुए हैं।