
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच उभरी राजनीतिक दूरी पर बसपा की नजर है। बसपा सपा और कांग्रेस के बीच की नाराजगी का यूपी में फायदा उठाने की पूरी कोशिश करेगी।कहा तो यह भी जा रहा है कि सपा से अलगाव होने की स्थिति में कांग्रेस और बसपा के बीच नजदीकियां बढ़ सकती हैं। बसपा लोकसभा चुनाव को फतेह करने के लिए दलित, मुस्लिम और ओबीसी कार्ड खेलने की रणनीति पर पहले से काम कर रही है। भाजपा के खिलाफ यही फार्मूला जिताऊ साबित हो सकता है।
बदलते राजनीतिक समीकरण पर नजर
बसपा ने वैसे तो लोकसभा चुनाव में अपने दम पर लड़ने का ऐलान कर रखा है, लेकिन मौजूदा समय तेजी से बदल रहे राजनीतिक समीकरण पर भी उसकी नजर है। बसपा ने अभी तक इंडिया और एनडीए दोनों गठबंधनों से अपने को अलग कर रखा है। यूपी में भाजपा के खिलाफ मजबूती से लड़ने वाली पार्टियों में सपा और बसपा ही है। यूपी में कांग्रेस काफी समय से राजनीतिक बनवास झेल रही है। उसके वोट बैंक पर अन्य पार्टियों ने कब्जा कर रखा है। इसीलिए कांग्रेस से सपा की दूरी होने पर यूपी में नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं। बसपा की नजर इस पर भी है।
टूटते रहे हैं गठबंधन
बसपा ने मध्य प्रदेश और राज्यस्थान में पिछले विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए बाहर से समर्थन दिया था, लेकिन उनके विधायकों को तोड़ लिया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में सपा से गठबंधन पर बसपा चुनाव लड़ी। बंटवारे में बसपा के हिस्से 38 तो सपा के पास 37 सीटें आईं। इस चुनाव में बसपा ने 10 तो सपा ने पांच सीटें जीतीं, लेकिन परिणाम आने के कुछ दिनों बाद ही दोनों में गठबंधन टूट गया। मायावती ने सपा पर कॉडर बिहीन पार्टी होने का आरोप लगाया था। यूपी में बसपा और कांग्रेस भी गठबंधन पर चुनाव लड़ चुकी है। बसपा भले ही अभी अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसकी स्थिति भी अच्छी नहीं है। इसीलिए भविष्य में नए गठबंधन के समीकरण बनें तो कोई अचरज की बात नहीं।